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अल्मोड़ा- अब भी हैं सबक सिखाने को तैयार,चीन के दांत खट्टे करने के लिए ख़ास ट्रेनिंग से लैस हैं ये जवान…

अल्मोड़ा- चीन और नेपाल भारत को इन दिनों आंख दिखा रहे हैं तो उत्तराखंड के पहाड़ों में ख़ासतौर पर पहाड़ी इलाकों में युद्ध के लिए तैयार एक फ़ोर्स के बाजू फड़क रहे हैं. 1962 के चीन युद्ध के बाद सीमावर्ती प्रदेशों में एसएसबी ने स्वयं सेवकों को युद्ध का प्रशिक्षण देना शुरु किया था. तब से 2002 तक लगातार देश भर के सीमावर्ती राज्यों के युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया था. लाखों की संख्या में प्रशिक्षण लेकर युवा एसएसबी में भर्ती होकर देश की सेवा भी करने लगे थे लेकिन बड़ी संख्या में उत्तराखंड के युवाओं को यह मौका नहीं मिला था. अब इन एसएसबी गुरिल्लाओं का कहना है कि अगर सरकार उन्हें अब भी मौका दे तो वे चीन के दांत खट्टे करने को तैयार हैं.

प्रशिक्षण और धरना

1962 की जंग के बाद पहाड़ी राज्यों के लाखों युवाओं को सीमा पर जंग के लिए तैयार करने के लिए शुरुआत में हिमाचल के सराहन में एसएसबी युद्ध का प्रशिक्षण देती थी. उसके बाद उत्तराखण्ड के ग्वालदम में भी युवाओं को देश की सुरक्षा के लिए 42 दिनों का स्पेशल प्रशिक्षण दिया जाने लगा.

1962 से 2002 के बीच लाखों युवाओं को 2002 में सीमा पर जंग के लिए ट्रेनिंग दी गई लेकिन 2002 में एसएसबी के लिए में सभी युवाओं के लिए खुली भर्ती शुरु कर दी गई जिससे इन प्रशिक्षित युवाओं को बड़ा झटका लगा. 2002 में मणिपुर सरकार ने एक अच्छी पहल करते हुए राज्य में इन प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी दी.

एसएसबी गुरिल्ला संगठऩ के प्रदेश अध्यक्ष बह्मानन्द डालाकोटी का कहना है कि आज भी आधे से ज़्यादा वॉर ट्रेनिंग पाए हुए ये युवा लड़ने के काबिल हैं. डालाकोटी कहते हैं कि चीन की बदमाशियों देखकर उनकी भुजाएं फड़क रही हैं और वे उसे सबक सिखाना चाहते हैं. अगर सरकार इन प्रशिक्षित युवाओं को मौका दे तो वे आज भी चीन के दांत खट्टे कर सकते हैं.