Breaking News गुजरात बड़ी खबर

अहमदाबाद- 40 सालों से घर में रहती हैं अकेली वृद्धा,घर के अंदर दाखिल होना नहीं है आसान

पूरी दुनिया कोरोना वायरस की वजह से दहशत में है. जब से कोरोना वायरस के मामले सामने आए हैं, तब से चमगादड़ भी चर्चाओं में है. माना जा रहा है कि कोरोना चमगादड़ के रास्ते इंसान में पहुंचा. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रमन आर गंगाखेडकर ने भी चीन के रिसर्च का हवाला देते हुए माना है कि कोरोना वायरस पहले चमगादड़ के भीतर विकसित हुआ और उसके बाद इंसानों में फैला. गुजरात के पाटण जिले में एक गांव ऐसा है जो इसी वजह से दहशत में है.

पाटण जिले का नेद्रोडा गांव की सड़के वीरान हैं, इक्के-दुक्के लोग चलते नजर आ रहे हैं लेकिन ये सब लॉकडाउन की वजह से नहीं है. आप सोच रहे होंगे कोरोना वायरस की दहशत से लोग घरों में कैद होंगे, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है.

जब गांववालों से यह जानने की कोशिश की गई कि आखिर क्या वजह है कि लोग अपनी खिड़कियां भी खोलने को तैयार नहीं हैं? जवाब हैरान करने वाला था. लोग उस गांव के एक घर से डर रहे हैं, जिसमें पिछले 40 सालों से कमुबेन पांचाल नाम की एक वृद्ध महिला रहती हैं. लेकिन यह कोई भूत प्रेत की कहानी भी नहीं है.

आप सोच रहे होंगे कि जब भूत-प्रेत की कहानी भी नहीं है तो फिर लोग उस मकान से क्यों डरते हैं?

आजतक की टीम यह जानने पहुंची की आखिर उस घर में ऐसा क्या है कि लोग अपने खिड़की-दरवाजे भी नहीं खोल रहे? हमारी टीम के लिए उस कमरे में घुसना आसान नहीं था. दरवाजे से होते हुए घर में दाखिल हुए तभी एक चमगादड़ उड़ता हुआ सामने से गुजर गया. पीछे देखा तो होश उड़ गए. दीवार पर सैकड़ों की संख्या में चमगादड़ चिपके हुए थे.

अंदर दाखिल होने के लिए बर्तन-ताली और थाली बजाते रहे. तब जाकर चमगादड़ ने रास्ता दिया.

कमुबेन ने बताया कि वो पिछले 40-50 सालों से इसी तरह चमगादड़ के साथ घर में रहती हैं. रात में अक्सर चमगादड़ उनके ऊपर गिर जाते हैं. कई बार काटने भी आते हैं. पूरी रात दहशत में बीतती है, लेकिन क्या करें? कहां जाए? प्रशासन से भी शिकायत की लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल रहा. वो बोलेते-बोलते हांफने लगीं. उन्हें श्वास संबंधी दिक्कत महसूस हो रही थी. उन्होंने बताया कि इन सब वजहों से वो अक्सर बीमार रहती है.

गांव के सरपंच दसरथजी ठाकोर ने कहा, अब आप ही सोचिये घर में अकेली वृद्ध महिला और हजारों चमगादड़ एक साथ कैसे रह पाते होंगे. ये एक या दो दिन की बात नहीं, पिछले 40 साल ऐसे ही चमगादड़ो के साथ रहते हुए गुजरे हैं. लेकिन हाल के दिनों में गांव के लोगों को जितना कोरोना वायरस का भय नहीं है उससे कहीं ज्यादा इन चमगादड़ो का है.

गांव वालों को लग रहा है कि इन चमगादड़ों की वजह से गुजरात का पाटण दूसरा चीन का वुहान ना बन जाए.