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गोंडा,यूपी – आजाद युवा विकास फाउंडेशन केे द्वारा माह के प्रत्येक रविवार को सरयू स्वच्छता अभियान चलाकर सरयू में फेंके गये वर्जित व हानिकारक पदार्थो को निकालकर अरसे से सरयू की साफ सफाई की जा रही है

फाउंडेशन के अध्यक्ष हर्षित सिंह ने बताया जैसे देशवासियों ने स्वच्छता को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। आइए, वैसे ही जल संरक्षण के लिए एक जन आंदोलन की शुरुआत करें। देश में पानी के संरक्षण के लिए कई पारंपरिक तौर-तरीके सदियों से उपयोग में लाए जा रहे हैं। जल संरक्षण के उन पारंपरिक तरीकों को लोग एक दूसरे से साझा करें। जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले व्यक्तियों का, स्वयं सेवी संस्थाओं का, और इस क्षेत्र में काम करने वाले हर किसी का, उनकी जो जानकारी हो वह सभी लोग एक दूसरे से जागरूकता अभियान के जरिए लोगों को जागरूक करें जिससे सरयू और उनके अस्तित्व को बचाया जा सके । हाल ही में गांव कनेक्शन के सर्वे में भी देश में तेजी से उभर से जल संकट की तस्‍वीर भी देखने को मिली है। 19 राज्यों में 18,000 ग्रामीणों के बीच किए गए सबसे बड़े ग्रामीण सर्वे में जो आंकड़े सामने आए वो पानी को लेकर ग्रामीणों के दर्द की कहानी कहते हैं। सर्वे में 12.5 फीसदी लोगों ने माना कि उन्‍हें पानी के लिए घर से लगभग आधा किमी दूर तक जाना होता है। वहीं, 22.8 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्‍हें पानी के लिए घर से लगभग 200 मीटर दूर जाना होता है।


फाउंडेशन के उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह ने कहा कि भारत के 60 करोड़ लोग इस समय इतिहास के सबसे बुरे जल संकट से जूझ रहे हैं। केन्द्र सरकार के नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर प्रोग्राम के तहत हर ग्रामीण को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाना है। इस योजना में साल 2014-15 में जहां 15,000 करोड़ रुपये जारी होते थे, वहीं आज 700 करोड़ रुपये ही जारी हो रहे हैं।


नीति आयोग की वर्ष 2018 में आई रिपोर्ट कहती है कि वर्ष 2020 तक दिल्ली और बंगलुरू जैसे भारत के 21 बड़े शहरों से भूजल गायब हो जाएगा। इससे करीब 10 करोड़ लोग प्रभावित होंगे। अगर पेयजल की मांग ऐसी ही रही तो वर्ष 2030 तक स्थिति और विकराल हो जाएगी। अभियान में रमेश पांडेय , सचिन सिंह, कीर्तिवर्धन मिश्रा, हर्षवर्धन मिश्रा , विकास सिंह , मोनू सिंह आदि स्वयंसेवक उपस्थित रहे