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गोंडा-अधिवक्ता हितों के प्रति सरकार पर उदासीन रवैया का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल के आह्वान पर सोमवार को हाथों में लाल पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन व किया हड़ताल

रिपोर्ट- वीरेंद्र कुमार

 

गोंडा अधिवक्ता हितों के प्रति सरकार पर उदासीन रवैया का आरोप लगाते हुए अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल के आह्वान पर सोमवार को हाथों में लाल पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन व हड़ताल किया।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि चंद्र त्रिपाठी, सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेकमणि श्रीवास्तव, फौजदारी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रवि प्रकाश पांडेय ने संयुक्त रूप से किया। बार कौंसिल आफ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर सोमवार को प्रदेश के अधिवक्ता कलमबंद हड़ताल पर रहे।
अधिवक्ताओ ने कहा कि वर्तमान सरकार उनके हितों की अनदेखी कर रही है। इससे पहले की सरकारों द्वारा जिला मुख्यालयों पर अधिवक्ताओं के बैठने के लिए टीन शेड निर्माण हेतु पच्चीस लाख रुपये तथा प्रतिवर्ष चालीस करोड़ अधिवक्ताओं के हितार्थ में दिया जा रहा था।इसके अलावा अधिवक्ताओं की विधवाओं को पांच लाख रुपए दिये जा रहे थे।लेकिन मौजूदा सरकार अपने घोषणा पत्र में किए गए वायदों को ही नहीं पूरा कर सकी। जिसके विरुद्ध अधिवक्ता सोमवार को बांह में लाल पट्टी बांधकर प्रदेश सरकार के विरोध प्रदर्शन किये।

अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि उनकी मागें शासन द्वारा नहीं मानी जाती हैं तो प्रदेश सरकार के विरुद्ध व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। इस मौके परमहामंत्री राम बुझारथ दूबे, महेश कुमार सिंह, विंदेश्वरी प्रसाद दूबे, गोकरननाथ पांडेय, संगमलाल सिंह, ज्ञानचंद्र श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र त्रिपाठी, राम कृपाल शुक्ला, उपेंद्र मिश्रा, जमील अहमद, कमाल वारिस , शमीम अतहर , आदि मौजूद रहे।

ये हैं मांगें-

प्रतिवर्ष पूर्व सरकारों की भांति उत्तर प्रदेश अधिवक्ता न्यासी समिति को चालीस करोड़ देने,अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि डेढ़ लाख से बढ़ाकर पांच लाख करने, साठ से सत्तर वर्ष के बीच मृत्यु होने पर अधिवक्ताओं के आश्रित को पांच लाख की आर्थिक मदद देने, जूनियर अधिवक्ताओं को तीन वर्ष तक दस हजार रुपये प्रति माह प्रोत्साहन भत्ता देने, अधिवक्ताओं को लाइब्रेरी हेतु पांच हजार रुपये प्रतिवर्ष देने की घोषणा पर तत्काल अमल करने, अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने, क्रिमिनल कंटेम्प्ट प्रक्रिया को समाप्त करने, प्रदेश में निर्ममता पूर्वक मारे गए अधिवक्ताओं के आश्रितों को कम से कम पचास लाख रुपए का मुआवजा देने, कचहरी आदि सार्वजनिक जगहों पर से छुट्टा मवेशियों को पकड़वाने तथा स्वेच्छा से अपनी डिग्री को बार कौंसिल में जमा कर विधि व्यवसाय न करने वाले अधिवक्ताओं को बीस हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने की मांग शामिल है।