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गोण्डा करनैलगंज- नमो अपहरण गैंग के सरगना की तलाश बाकी

नमो अपहरण गैंग के सरगना की तलाश बाकी

करनैलगंज (गोंडा)। नगर के बड़े व्यापारी के पौत्र के अपहरण में हुआ खेल नादानी है या पर्दे के पीछे किसी बड़े के भी हाथ हैं? पुलिस ने भले ही बच्चे के अपहरण व चार करोड़ की फिरौती मांगने की गुत्थी को सुलझा लिया हो, मगर इस नए गैंग में पर्दे के पीछे सरगना की तलाश बाकी है।

करनैलगंज नगर में पहली बार हुए अपहरण जैसी गंभीर घटना और एक बड़े व्यापारी के 7 वर्षीय बेटे को चार करोड़ रुपये फिरौती के लिए अपहरण कर लेना, बच्चों का खेल नहीं है। कहीं इसके पीछे कोई सरगना का हाथ तो नहीं है। यह करनैलगंज क्षेत्र के लोगों व पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है। जिस तरह बच्चे के अपहरण की वारदात नगर में कस्बा पुलिस चौकी के बिल्कुल बगल में की गई और अपहरण करके चार करोड़ रुपये की फिरौती मांगने की स्क्रिप्ट तैयार की गई। इस भूमिका के पीछे पकड़े गए एक महिला समेत पांच लोगों का नाम काफी नहीं है।
इतनी बड़ी घटना को अंजाम देना बच्चों का खेल नहीं है। पकड़े गए सभी अभियुक्त 20 वर्ष के आसपास हैं और यह खेल किसी लड़कपन में न करके कहीं इस गैंग को तैयार कर बड़ी घटना को अंजाम देने का रिहर्सल तो नहीं किया जा रहा था। यह बात लोगों को अब चुभने लगी है। करनैलगंज नगर में कस्बा पुलिस चौकी से मात्र 20 मीटर की दूरी पर कस्बे के पान मसाला, गुटखा, बीड़ी, तंबाकू के बड़े व्यापारी राजेश गुप्ता के घर से और पुलिस चौकी के बगल में ही अल्टो कार खड़ी करके बच्चे का अपहरण कर ले जाना, पुलिस के लिए तो एक चुनौती है ही मगर अब उससे बड़ी चुनौती उसके पीछे के राज को निकालना है। पकड़ी गई महिला छवि पांडेय और उसके 4 साथी इस तरह है जिनमें महिला व तीन अभियुक्तों के विरुद्ध कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं है। वही महिला के पति सूरज पांडेय के विरुद्ध मोटरसाइकिल चोरी एवं अन्य छोटी-छोटी घटनाओं को करने का आरोप दर्ज है। वह जेल भी जा चुका है, जेल में तमाम बड़े अपराधियों के बीच वह एक माह तक रहा है।
विकास दूबे की घटना ने छवि को दिखाया अपराध का रास्ता
फिरौती के लिए बच्चे का अपहरण करने की वारदात व बच्चे के परिजनों से काल करके शातिराना अंदाज में फिरौती की डिमांड करने वाली महिला छवि पांडेय की धमकी भरी आवाज में कानपुर विकास दूबे की घटना का उदाहरण देना बाद में हास्यस्पद लग रही हो मगर उसकी रवों में दौड़ रहा खून कानपुर से सटे शुक्लागंज का ही है। छवि का मायका शुक्लागंज की मिश्रा कॉलोनी में है। उसकी शादी सूरज के साथ फरवरी 2018 में हुई थी। वह करनैलगंज नगर के सकरौरा मोहल्ले में रहती थी। उसके ससुर अपने गांव शाहपुर चले गए थे। वह अपने पति सूरज, देवर राजा बाबू पांडेय एवं दोनों के दो मित्रों समेत घर मे ही रहते थे। जहां कोई काम धंधा नहीं था। बल्कि उमेश यादव व दीपू कश्यप दोनों करनैलगंज बाजार में किराने की दुकान पर पहले नौकरी करते थे बाद में उनकी चोरी पकड़ी गई और व्यापारी ने उन्हें भगा दिया। तभी से सूरज व राजा के साथ रहने लगे। दोनों को अपने घरों से भी वास्ता नहीं होता था। खाली दिमाग शैतान का घर वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए सभी ने बच्चे के अपहरण की योजना तैयार कर डाली। फिर क्या था उसे अपने मायके कानपुर में हुई घटना की धौंस सुनाकर चार लाख के बजाय चार करोड़ की डिमांड कर दिया। रकम अधिक होने से मामला हाईप्रोफाइल बन गया। जो लोगों के गले नहीं उतर रहा है।
रामलीला में राम की भूमिका निभाने में राजा को नहीं मिली नसीहत
भगवान श्रीराम के चरित्र पर आधारित नगर के सकरौरा के प्रसिद्ध श्रीराम लीला धनुषयज्ञ महोत्सव में श्रीराम की भूमिका निभाने वाले इस अपहरण व फिरौती की घटना में शामिल अभियुक्त राजा बाबू पांडेय उर्फ राज पांडेय को कोई सीख नहीं मिली। पिछले दो वर्ष तक राजाबाबू श्रीराम तो उसका छोटा भाई उदय पांडेय लक्ष्मण का अभिनय करते रहे हैं। मगर अपराध जगत में पैर रखकर बड़ा सपना देखना और भाभी छवि पांडेय के सपनों को साकार करने के लिए उसका नाम अब करनैलगंज ही नहीं बल्कि जिले के बड़े अपराधियों में शामिल हो गया। काश: रामलीला में अभिनय से उसे कुछ नसीहत मिल गई होती।
अपहरण कांड में व्यवसायी के बेटे को सुरक्षित बचाना प्राथमिक थी। उसे बचा लिया गया। अभी पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच में अगर अपहरण के पीछे कोई और पाया गया तो उसे भी बख्शा नहीं जाएगा। -राजनाथ सिंह, प्रभारी निरीक्षक करनैलगंज