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नई दिल्ली:लाखों लोग सहुलियत से दूर उद्योगपति रतन टाटा साझा किए अपने विचार

नई दिल्ली: मुंबई के स्लम इलाके धारावी में कोरोना वायरस (Coronavirus) फैलने पर विख्यात उद्योगपति रतन टाटा (Ratan Tata) ने अपने विचार साझा किए हैं. धारावी में कोरोना के बढ़ते मामलों के बाद स्थानीय प्रशासन द्वारा इलाके को सील किया जा चुका है. डेवलपरों और आर्किटेक्टों की तीखी आलोचना करते हुए उन्होनें कहा है कि वे स्लम यानी झुग्गी-झोपड़ियों को शहर के अवशेष के रूप में ट्रीट करते हैं. टाटा के मुताबिक शहरों में स्लम बस्तियां उभर आने के लिए बिल्डरों को शर्म आनी चाहिए.

लाखों लोग सहुलियत से दूर
हाल ही में हुए भविष्य के डिजाइन और निर्माण विषय पर एक ऑनलाइन चर्चा के दौरान रतन टाटा ने कहा, ‘कोरोना वायरस के कहर ने शहर में आवास के संकट को उजागर किया है. मुंबई के लाखों लोग ताजी हवा और खुली जगह से महरूम हैं. बिल्डरों ने ऐसे स्लम बना दिए हैं, जहां सफाई का इंतजाम नहीं है. हम वहां उच्च कोटि के आवास डिजाइन करते हैं जहां कभी झुग्गी-झोपड़ियां थीं. ये स्लम विकास के अवशेष की तरह हैं. हमें शर्म आनी चाहिए क्योंकि एक तरफ तो हम अपनी अच्छी छवि दिखाना चाहते हैं दूसरी और एक हिस्सा ऐसा है जिसे हम छिपाना चाहते हैं.’
कोरोना ने समस्या को रेखांकित किया
इस महामारी ने स्लम बस्ती द्वारा हर किसी के लिए खड़ी की जाने वाली समस्या को रेखांकित कर दिया है. अगर हमें अपनी उपलब्धियों पर गर्व होता है तो अपनी नाकामियों पर शर्मिदा भी होना चाहिए. गौरतलब है कि मौजूदा समय महाराष्ट्र में कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से बढ़ता जा रहा है और इसमें भी सबसे बड़ा खतरा झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाके धारावी में कोरोना का प्रकोप है. धारावी में अब तक 150 से ज्यादा कोरोना के मामले सामने आ चुके हैं और यह संख्या बढ़ सकती है.