Breaking News नई दिल्ली बड़ी खबर

नई दिल्ली- दो नर्सों की कोरोना से मौत के बाद भी नहीं मिले 1 करोड़ रुपए- राहुल गांधी से बोले AIIMS के विपिन

नई दिल्ली- कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने डॉक्टर्स डे (Doctor’s Day 2020) के मौके पर आज कोरोना वायरस की जंग लड़ रहे स्वास्थ्य कर्मियों से बातचीत की. राहुल ने इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में कार्यरत नर्सेस से बातचीत की. बातचीत के दौरान दिल्ली एम्स में कार्यरत मेल-नर्स विपिन कृष्णन ने बताया कि भारत में हेल्थ सेक्टर में काम करने वाले लोगों की तरफ सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.

कोरोना महामारी के दौर में जिन चुनौतियों से जूझते हुए स्वास्थ्यकर्मी काम कर रहे हैं, उसको देखते हुए सरकार को नीतियां बनानी चाहिए. बातचीत के दौरान विपिन ने दिल्ली सरकार (Delhi Govt) के उस ऐलान की तरफ भी राहुल का ध्यान दिलाया, जिसमें कोरोना से मौत होने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों को 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की गई थी. विपिन ने कहा कि एम्स के दो नर्सों की कोरोना से मौत हो गई, लेकिन अभी तक उनके परिजनों को पैसे नहीं मिले हैं.

केरल के रहने वाले और पिछले 2 साल से दिल्ली AIIMS में कार्यरत विपिन कृष्णन ने राहुल गांधी से बातचीत के दौरान कई आंकड़े पेश किए. उन्होंने बताया कि 1.2 मिलियन एलोपैथिक डॉक्टर और 3.7 मिलियन नर्स हैं. WHO के मुताबिक 1000 लोगों पर एक डॉक्टर और 3 नर्स हैं. निजी और सरकारी अस्पतालों के हालात अलग-अलग हैं. प्राइवेट अस्पतालों के नर्सेस के वेतन काटे जा रहे हैं. उनकी आजीविका का सवाल है. वे रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जूझ रहे हैं. सरकार को इनकी तरफ ध्यान देना चाहिए. विपिन ने कहा कि जहां तक इस बीमारी से डर की बात है या कोरोना से लड़ने की बात है, नर्सेस को इससे डर नहीं लगता. विपिन ने बताया कि वे खुद कोरोना पेशेंट रहे हैं, लेकिन इससे डर जैसा कुछ उनके दिमाग में नहीं है. उन्होंने कहा कि हम जैसे फ्रंटलाइन वॉरियर्स की बात है, हमें डर नहीं लगता, लेकिन मैं कोविड वार्ड नहीं जाना चाहता.

राहुल गांधी के कोरोना जांच कम होने की बात पर कृष्णन ने सहमति जताते हुए कहा कि दिल्ली में 27 मई को इंफेक्शन रेट 13.7 प्रतिशत था, उस समय 7000 टेस्ट प्रतिदिन होते थे. 12-13 जून तक संक्रमण की दर 30 फीसदी हो गई, लेकिन टेस्ट घटकर 5000 हो गए. यह बेहद खतरनाक है. साथ ही समझ से परे है कि जब बीमारी बढ़ रही है तो टेस्ट कम क्यों हो रहे हैं. यह मरीजों के जान से खिलवाड़ करना है. हम महामारी से जूझ रहे हैं. एम्स के डायरेक्टर या दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी कहा है कि जुलाई तक यह आंकड़ा 5.5 लाख तक पहुंच सकता है, ऐसे में हमें इस महामारी से लड़ने के लिए और भी गंभीरता से विचार करना चाहिए.

विपिन ने बताया कि जब वे कोरोना पॉजिटिव हो गए थे, उस समय तक हालात ठीक थे. लेकिन जब उनकी पत्नी में कोरोना का संक्रमण पाया गया, तो उन्हें चिंता हुई, क्योंकि तब तक हालात बहुत बिगड़ गए थे. राहुल गांधी के साथ बातचीत के दौरान विपिन कृष्णन ने हेल्थकेयर वर्कर्स को कोरोना से लड़ने वाली सेना बताते हुए कहा कि हम फ्रंटलाइन पर काम कर रहे हैं. विश्वास है कि हम कोरोना से जंग जीतेंगे, लेकिन सरकार को हमारी तरफ ध्यान देना चाहिए. विपिन ने कहा कि AIIMS के दो नर्सों की कोरोना से मौत हो गई, लेकिन दिल्ली सरकार ने जो 1 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया था, उन्हें अब तक नहीं मिले हैं. विपिन ने कहा कि कोरोना को देखते हुए डॉक्टरों और नर्सों को भी रिस्क अलाउंस मिलना चाहिए.

मूल रूप से राजस्थान के सीकर के रहने वाले नरेंद्र सिंह इन दिनों ऑस्ट्रेलिया में मेल-नर्स के रूप में काम कर रहे हैं. राहुल गांधी के साथ बातचीत में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में COVID-19 की रोकथाम और वहां के अस्पतालों में इससे निपटने को लेकर कई जानकारी दी. नरेंद्र सिंह ने बताया कि जब कोविड-19 की शुरुआत हुई थी तो उस समय इसे गंभीरता से नहीं लिया गया. सोचा कि ये सामान्य फ्लू है, लेकिन धीरे-धीरे समझ में आया कि यह महामारी है. इसके बाद हम गंभीर हुए.

एक बार जब बीमारी बढ़नी शुरू हुई, इटली और अन्य देशों से मौत की खबरें आने लगीं तो हमने अलग से तैयारी शुरू की. अस्पताल में अलग से आईसीयू बनाने की बात हो या मरीजों के लिए अलग से मेडिकल उपकरणों के इस्तेमाल की बात हो, ऑस्ट्रेलिया में हर तरह से इस महामारी से निपटने की तैयारियां की गईं. यही वजह है कि इस बीमारी पर बहुत जल्द नियंत्रण पाया जा सका. नरेंद्र ने कहा कि सोशल डिस्टेंसिंग और लगातार मास्क का इस्तेमाल कर ही हम इस बीमारी से बच सकते हैं.
राहुल गांधी ने कोरोना से लड़ने के लिए आगे की रणनीति के बारे में भी बात की. इस दौरान एम्स के नर्स विपिन कृष्णन ने कहा कि कोरोना से लड़ने वाले फ्रंटलाइन वॉरियर्स की समस्याओं पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए. विपिन ने कहा कि नर्सिंग पेशे के लिए नीति बनाई जानी चाहिए. सरकार को चाहिए कि मेडिकल क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर यह नीति बनाई जानी चाहिए. हेल्थ सेक्टर में कई संगठन काम कर रहे हैं, फिर भी हमें लगता है कि हमारी तरफ ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

न्यूजीलैंड का अनुभव बताते हुए अनु रगनौत ने कहा कि कोरोना संक्रमण के दौरान 5 हफ्तों तक लॉकडाउन था. इस दौरान सरकार रोजाना बातचीत करती थी. हर दिन दोपहर 1 बजे यहां के स्वास्थ्य मंत्री और राष्ट्रपति प्रेस कॉन्फ्रेंस करते थे. न्यूजीलैंड में रहने वाले सभी लोग इस कॉन्फ्रेंस का इंतजार करते थे. मुझे लगता है कि इस महामारी से लड़ाई में लीडरशिप की भूमिका बहुत बड़ी है.