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बहराइच- DGP साहब! 6 माह बाद भी कोतवाल मुर्तिहा नहीं लगा पाए निर्वस्त्र हालत में फेंकी गयी युवती के हत्यारों का कोई सुराग!

SP, एडिशनल और CO गए बदल लेकिन नहीं बदले कोतवाल!

मुर्तिहा कोतवाल की लापरवाही से मिट गए थे मौके के तमाम जिंदा साक्ष्य !

उत्तर प्रदेश बहराइच- यूपी की योगी सरकार महिला अपराध को लेकर जितना संजीदा है। वहीं पुलिस के तमाम जिम्मेदार संगीन अपराधों में भी अपनी तरफ से लापरवाही की हद पार करने से नहीं बाज आ रहे। जिसका फायदा कहीं न कहीं अपराधी उठा रहे हैं, और खामियाजा पीड़ितों को उठाना पड़ रहा है।

ताज़ा उदाहरण कोतवाली मुर्तिहा का है। जहाँ पर बीते 6 माह पूर्व जंगल क्षेत्र में मिली एक 17 वर्सीय अज्ञात युवती की निर्वस्त्र हालत में मिली लाश आज तक रहस्य का सवाल बना हुआ है, और युवती के कातिल पुलिस के चंगुल से आजाद घूम रहे हैं। युवती की नग्न लाश कोतवाली मुर्तिहा के नौबना जंगल से बरामद हुई थी। मृतका की पहचान मिटाने के लिये हत्यारों ने उसके चेहरे पर ज्वलन शील पदार्थ भी डाला था, ज्वलन शील पदार्थ से घटनास्थल पर उगी घास फूस बुरी तरह झुलस गई थे।जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि युवती की हत्या में इस्तेमाल किया गया रसायन कितना घातक रहा होगा।

घटना की सूचना पाकर तत्कालीन SP डॉ गौरव ग्रोवर ने घटना स्थल का दौरा कर 48 घण्टे में खुलासा करने का आस्वासन भी दिया था। यही नहीं लापरवाही के मामले में दोषियों पर शख़्त करवाही का भी भरोसा जताया था।
उसके बावजूद आज 6 माह बाद भी ना तो युवती के हत्यारों का कोई सुराग लग सका है, और ना ही नग्न हालत में झाड़ियों में मिली अज्ञात युवती की कोई शिनाख्त हो सकी है।

SP से लेकर CO तक गए बदल,जमें हैं तो सिर्फ कोतवाल

आपको बता दें कि तत्कालीन SP डॉ.गौरव ग्रोवर , एडिशनल SP रवींद्र कुमार सिंह, और CO नानपारा अरुण चंद की बदली हो गयी, लेकिन इतनी बड़ी संवेदनशील घटना के बावजूद इलाके के कोतवाल अशोक सोनकर पर कोई भी करवाही फिक्स नही की गई, आलम ये है कि आज तक कोतवाल मुर्तिहा का चार्ज अशोक सोनकर संभाल रहे हैं।

कोतवाल मुर्तिहा ने मौके पर की थी ये बड़ी चूक।

इतनी बड़ी संवेदनशील घटना पर कोतवाल मुर्तिहा अशोक सोनकर ने घटनास्थल पर क्राईम सीन करने में कहीं न कहीं बड़ी लापरवाही की। जिसके चलते आज तक 6 माह से अज्ञात युवती की लाश के ना तो कातिलों का कोई सुराग लग सका और ना ही लाश को मिला इंसाफ !

ये है पुलिस की क्राईम सीन की गाईड लाईन

पुलिसिया गाईडलाईन के अनुसार किसी भी संवेदनशील घटना पर पुलिस टीम को तत्काल घटनास्थल को यलो टेप से घेराबंदी करके संरक्षित करनें का प्राविधान है। क्योंकि घटना के खुलाशे में मौके के साक्ष्य ही सबसे अहम माने जाते हैं। उसके बाद डॉग स्क्वायड (स्वान दस्ता) फोरेंसिक टीम मामले की तहकीकात करती है। लेकिन इस घटना कांड में कोतवाल मुर्तिहा ने हर मामले में बड़ी चूक की। ना तो घटना स्थल को यलो टेप से घेरा गया, ना ही मौके पर समय से डॉग स्क्वायड पहुंचा, और ना ही फोरेंसिक टीम को बुलाया गया। आनन फानन में युवती के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाऊस भिजवा दिया गया। युवती के शव की हालत उसके साथ हुई हैवानियत की सारी गवाही स्वयं दे रही थी। 
पुलिसिया कानून के जानकारों के अनुसार घटना स्थल की तत्काल घेराबंदी करने ,व मौके पर मिले साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने से फोरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की मदद से 95 प्रतिशत संगीन मामलों के खुलासों में पुलिस को जल्द से जल्द कामयाबी मिलती है।
सबसे बड़ी चौकाने वाली बात ये है कि, जिस इलाके में इतनी बड़ी संवेदनशील घटना प्रकाश में आई, वहाँ के स्टेशन अफसर पर करवाही होने के बजाय आज 6 माह बाद भी कोतवाली का प्रभार कोतवाल मुर्तिहा अशोक सोनकर के जिम्मे चल रहा है।
वहीं इस मामले में SP बहराइच विपिन मिश्रा का कहना है की मामले के खुलासे के लिये प्रयास जारी है, अब देखना ये है कि यूपी की हाईटेक पुलिस 6 माह पूर्व हुई युवती की हत्या का राजफाश कब तक करने में कामयाब होता है..?