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बीकानेर से बिहार के लिए पैदल निकल पड़े 125 मजदूर,प्रशासन ने नहीं ली सुध

कोरोना वायरस की महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के तीसरे चरण में सरकार ने प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई. घर से दूर अन्य राज्यों में रह रहे मजदूरों को रहने और खाने के उचित प्रबंध का आश्वासन दिया. हादसों को देखते हुए किसी को भी पैदल नहीं जाने देने के आदेश दिए. उत्तर प्रदेश की सरकार ने पैदल आ रहे किसी भी व्यक्ति को सूबे की सीमा में प्रवेश नहीं करने देने के आदेश दिए.
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इन सबके बावजूद सरकार की मंशा और आदेशों को प्रशासनिक अमला ही बट्टा लगा रहा है. प्रवासी मजदूरों की पैदल घर वापसी का सिलसिला रुक नहीं रहा. प्रशासन मजदूरों की सुध नहीं ले रहा और मजबूर मजदूर पैदल ही घर पहुंचने की आस लिए तपती रेत पर चलने को मजबूर हैं. बीकानेर से 125 मजदूर पैदल ही बिहार के लिए निकल पड़े. बीकानेर और चुरू के प्रशासन ने रोकने और इनकी व्यथा को जानना या समझना भी जरूरी नहीं समझा. सीकर पुलिस ने अपनी सीमा पर पहुंचे इन मजदूरों को रोककर इनके रहने और खाने का प्रबंध करवाया.
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इनमें एक मजूदर ऐसा भी है, जिसके पाांव में फ्रैक्चर है. वह भी अपने साथियों के कंधे की सवारी करते घर की ओर निकल पड़ा. कभी किसी के कंधे पर बैठता, तो कभी किसी के. सबसे गर्म शहरों में से एक फतेहपुर शेखावटी की तपती धूप और शाम को चल रही धूल भरी आंधी, इन तमाम बाधाओं के बावजूद ये श्रमिक घर की ओर चले जा रहे थे. ऐसा तब है, जब राज्य सरकार बार-बार यह दावा कर रही है कि मजदूरों की घर वापसी के लिए व्यवस्था की जा रही है.
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सरकार के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यही है कि मजबूर मजदूर व्यवस्था की खामी या प्रशासनिक लापरवाही के कारण जान हथेली पर लेकर पैदल ही जाने को विवश हैं. मजदूरों के अनुसार जिलाधिकारी से भी बिहार स्थित अपने घर जाने की अनुमति मांगी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी. हर तरफ से निराशा हाथ लगने पर थक-हारकर पैदल ही निकल पड़े.