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लखनऊ-जानें पूरा सच क्यायूपी में योगी सरकार ने बैन की अजान? पूरी खबर पढें

यूपी में योगी सरकार ने बैन की अजान? जानें पूरा सच
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सूबे में अजान पर बैन (Ban on Azan) लगा दिया है। वहीं सरकार की ओर से इन अफवाहों का खंडन किया गया है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में अजान पर किसी तरह का बैन नहीं लगाया गया है।
लखनऊ
कोरोना के खतरे को देखते हुए किए गए लॉकडाउन के बीच मुसलमानों का पवित्र रमजान का महीना शुरू हो चुका है। मुस्लिम समुदाय ने शनिवार को पहला रोजा रखा। कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते लगातार विभिन्न प्रदेशों की सरकारें मुस्लिमों से घर पर ही नमाज पढ़ने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील कर रही हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मस्जिदों से अजान पर पाबंदी लगा दी है। हालांकि यह दावा बेबुनियाद है, यूपी सरकार की ओर से अजान पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है।
दरअसल सोशल मीडिया पर पूर्व राज्यसभा सांसद शाहिद सिद्दिकी समेत कई यूजर्स ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश में अजान पर रोक लगा दी गई है। शाहिद ने ट्वीट किया, ‘रमजान में अजान बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह एक क्षेत्र विशेष के लोगों को सेहरी और इफ्तार के बारे में बताती है। इसे सुनकर ही लोग अपना रोजा तोड़ते हैं। भारत समेत पूरी दुनिया में कहीं पर भी अजान पर रोक नहीं लगाई गई है, फिर इसे यूपी में क्यों रोका गया है?’ शाहिद के अलावा अन्य कई यूजर्स ने भी इसे लेकर ट्वीट किए हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर किए जा रहे ये दावे पूरी तरह से गलत हैं।
अजान पर पाबंदी का सवाल ही नहीं: मंत्री
जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में रमजान के दौरान मस्जिदों से अजान पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। हालांकि मस्जिदों में नमाज पढ़ने को लेकर रोक जरूर है। उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा है कि अजान को लेकर सरकार ने किसी तरह की पाबंदी नहीं लगाई है। वहीं राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री मोहसिन रजा ने भी अजान पर पाबंदी की खबरों का खंडन किया। उन्होंने कहा, ‘हर जगह अजान हो रही है। मस्जिद में जो भी मौलवी रहते हैं, वह समय पर अजान देते हैं। अजान मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज, सेहरी और इफ्तार के समय को बताने का एक कॉल होता है, इसपर पाबंदी का सवाल ही नहीं उठता है।’