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श्रावस्ती- डीजल और पेट्रोल के दरों में वृद्धि होने से किसानों की कमर टूट गई है।

श्रावस्ती- डीजल और पेट्रोल के दरों में वृद्धि होने से किसानों की कमर टूट गई है। इसका विरोध करने के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व के आवाहन पर भारतीय किसान यूनियन श्रावस्ती के कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय हल्ला बोल का कार्यक्रम इकौना तहसील में रक्खा था, परंतु कोविड 19 के प्रोटोकॉल के तहत किसी को तहसील के अंदर प्रवेश नही करने की अनुमति नही मिली । बौध परिपथ तहसील के मुख्य गेट पर ही पुलिस ने किसानों को रोक लिया । जबकि यूनियन के लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी कर रहे थे। किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने जमकर सरकार विरोधी नारे लगाए तथा सरकार पर किसानों का शोषण करने का आरोप लगाया। योगी और मोदी सरकार को अमीरों की हितैषी व गरीबों की दुश्मन सरकार बताया। इकौना तहसील के बाहर मंगलवार को सुबह दस बजे किसान यूनियन के मंडल अध्यछ विनोद शुक्ला के नेतृत्व में पैदल चलकर कार्यकर्ता को पुलिस ने रोक दिया । मंडल अधयछ विनोद शुक्ल ने कहा कि देश की अस्सी प्रतिशत किसान खेती पर निर्भर है,। लेकिन डीजल और पेट्रोल के रेट बढ़ने से किसानों की कमर टूट गई है। क्योकि कृषि कार्य के लिए सबसे ज्यादा डीजल की खपत किसान ही करता है। किसानों को फसल का उचित दाम न मिलने से खेती अब घाटे का सौदा साबित हो रही है। जिला अध्यछ सोम शर्मा ने कहा कि किसान कर्ज में डूबकर आत्महत्या करने को मजबूर है। किसानो के ऊपर पेट्रोल डीजल के रेट बढ़ने से किसान पूरी की पूरी तरह से कमर टूट गयी है। जबकि कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय मूल्य काफी कम है। पेट्रोल डीजल के दाम को घटाने के लिए किसान यूनियन ने उपजिलाधिकारी राजेश मिश्रा को मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन तहसील के मुख्य गेट पर सौंपा गया । किसान यूनियन ने कहा यदि पेट्रोल डीजल के दाम कम नहीं हुए तो किसान यूनियन उग्र आंदोलन करेगा। इस मौके पर पुलिस अधिकारी व दो दर्जन किसान यूनियन कार्यकर्ता मौजूद रहे ।

रिपोर्ट- धर्मेन्द्रकुमार गुप्ता / के के गुप्ता