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सपा की सैफई में होली ,होली के मंच पर पहुँचे शिवपाल सिंह के अखिलेश यादव ने पैर छू कर किया स्वागत,

अखिलेश मुलायम ने खेली फूलो की होली, होली के मंच पर पहुँचे शिवपाल सिंह के अखिलेश यादव ने पैर छू कर किया स्वागत, लेकिन नही हुई किसी मे कोई बात, वही शिवपाल के मंच पर पहुँचने से लगे चाचा भतीजे ज़िंदाबाद के नारे , नारो से गुस्साये अखिलेश ने मंच से लोगो से कहाँ ” आज के बाद होली मनाने नही आऊंगा सैफई अगर इस तरह सीमाएं तोड़ी हर चीज़ की मर्यादाएं होती है सीमाएं तोड़ी तो राजनीति अपना अलग रास्ता ढूंढ लेती है” वही मंच पर पहुँचे रामगोपाल के नज़दीक बैठे रहें अखिलेश, नही हुई चाचा शिवपाल से कोई बात

– सैफई में नेता जी की पैतृक कोठी में सजे होली के मंच पर यू तो पूरा परिवार एक साल बाद फिर से साथ देखने को मिला लेकिन परिवार में चाचा भतीजे के बीच आपसी रिश्तों की कड़वाहट एक बार फिर देखने को मिली जब होली के मंच पर चाचा शिवपाल सिंह पहुँचते है तो अखिलेश यादव मंच से दूर दराज से आये लोगो को संबोधित कर रहे थे चाचा शिवपाल मंच पर आए और सबसे पहले नेता जी मुलायम सिंह के पैर छू कर आशीर्वाद लिया उसके बाद अखिलेश आगे बढ़ते है और बिना नज़र मिलाये चाचा शिवपाल के पैर छूते है और अखिलेश के पीछे बड़े भाई मुलायम से दूर बैठने को कुर्सी दी जाती है इसी बीच लोगो मे से चाचा भतीजे ज़िंदाबाद के नारे लगने लगते है तभी अखिलेश यादव का पारा चढ़ जाता है और अखिलेश मंच से नाराज़ होकर कहते है कि आगे अगर ऐसी मर्यादाएं तोड़ी तो सैफई फिर कभी होली खेलने नही आऊंगा, सीमा में रहो नही तो राजनीति अपने रास्ते अलग ढूंढ लेती है देखा जाये तो अखिलेश और शिवपाल के रास्ते तो पहले से अलग है फिर आखिर यह अखिलेश को क्यों कहना पड़ा कि सीमा में रहो नही तो राजनीति रास्ते बदल लेती है इसका मतलब है कि कि पहले से सब कुछ स्क्रिप्टिड था क्योंकि जैसे ही शिवपाल आते है नेता जी थोड़ी देर में मंच छोड़ देते है, उसके बाद अखिलेश और शिवपाल के बीच सैफई के प्रधान दर्शन सिंह बैठे रहते है और दोनों के बीच कोई बात नही होती, थोड़ी देर में रामगोपाल मंच पर आते है जो अखिलेश के बगल में बैठ जाते है और दोनों में देर तक बातचीत होती रहती है लेकिन शिवपाल और अखिलेश में दूरियां बनी रहती है

मंच पर परिवार ज़रूर एक होता है लेकिन सिर्फ लोगो को या फिर कार्यकर्ताओ के दिखाने के लिए यह सब होता है