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नई दिल्ली- विधानसभा चुनाव में बीजेपी के हार का कारण आया सामने यह असली वजह

नई दिल्ली

दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद समीक्षा बैठकों का दौर जारी है। शनिवार को दिल्ली के तीनों नगर निगमों के पार्षदों के साथ हार की समीक्षा बैठक की गई। इन बैठकों पार्टी प्रभारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में पार्षदों ने केंद्र सरकार के बजट से लेकर दिल्ली में टिकट वितरण तक को पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है। इन बैठकों में तीनों निगमों के कार्यों और पार्षदों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। भाजपा की ओर से भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, अनिल जैन और प्रदेश संगठन मंत्री सिद्धार्थन ने इन बैठकों का नेतृत्व किया। बैठकों में निगम पार्षदों ने अपनी शिकायतें रखी।
पूर्वी और उत्तरी दिल्ली नगर निगमों की बैठकों में पार्षदों ने कहा कि दिल्ली चुनाव के दौरान केंद्र सरकार का बजट आया, जिसमें दिल्ली को लेकर कोई खास बड़ी घोषणा नहीं की गई। साथ ही सरकारी कर्मचारियों को भी बजट से निराशा हाथ लगी है। पार्षदों का कहना था कि बजट में अगर दिल्ली को लेकर कुछ बड़ा किया जाता तो दिल्ली की जनता को भाजपा के लिए वोट देने के लिए प्रेरित किया जा सकता था।
वहीं दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के कई पार्षदों ने विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई सीटों पर ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है जो दो-दो बार चुनाव हार चुके हैं। पार्षदों का कहना था कि अगर पार्टी कुछ नए चेहरे मैदान में उतारती तो जरूर दिल्ली के नतीजे अलग हो सकते थे। पार्षदों का कहना था कि हारने के बाद पार्षदों पर ठीकरा फोड़ दिया जाता है, लेकिन पार्षदों की स्थिति भी पार्टी को समझनी चाहिए।

पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक, बैठकों का नेतृत्व करने वाले नेताओं ने पार्षदों और निगम के कार्यप्रणाली को लेकर जमकर फटकार लगाई है। नेताओं का मानना था कि अगर निगम पार्षदों ने बेहतर कार्य किया होता तो दिल्ली की जनता के बीच विकास के मुददों पर पार्टी चुनाव लड़ती।