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भोजपुरी में पढ़ें -चुनाव के तरंग बा, रंग-बिरंग के ढंग बा,बिहार विधानसभा के पहिला चरण हो गइल. दोसरा चरण अउर तीसरा चरण के तैइयारी चल रहल बा.

बिहार विधानसभा के पहिला चरण हो गइल. दोसरा चरण अउर तीसरा चरण के तैइयारी चल रहल बा. सभ पाटी के नेता इहे चिंता से परेशान बाड़े कि बिहार के विकास कइसे होई. बिहार के नइया के असली खेवइया के होई, ई बतावे खातिर घमासान मचल बा. चुनाव के तरंग बा, रंग-बिरंग के ढंग बा. रउआ सभे के सामने पेश बा बिहार चुनाव के तीन रंग.

भोटर के रिझावे खातिर नाच-गान
गोपालगंज के हथुआ विधानसभा सीट दू वजह से चर्चा में बा. पहिला ई कि इहां जदयू कंडिडेट रामसेवक सिंह अपना परचार खातिर बहुत खास इंतजाम कइले बाड़े. दोसर बात ई कि हथुआ बिहार के एकलौता सीट बा जहां से कवनो पाटी किन्नर कंडिडेट के चुनाव में खाड़ा कइले बा. रामसेवक सिंह के परचार खातिर दिल्ली से नुक्कड़ नाटक के मंडली आइल बा. ई मंडली हथुआ के गांवे गांवे घूम के नाच-बजान से भोटर के रिझा के रामसेवक सिंह खातिर भोट मांग रहल बा. रोड पs जब इ मंजली के कलाकार निकलतs बाड़े तs देखनिहार के मजमा लाग जाता. नाच-गान देखे के खातिर रैली से बेसिये भुड़ जुट रहल बा. जदयू के रामसेवक सिंह के खिलाफ लोजपा एगो किन्नर नेता के मैदान में उतरले बा . मुन्ना किन्नर उर्फ रामदर्शन परसाद एहिजा से लोजपा के टिकट पs चुनाव लड़ रहल बाड़े. किन्नर समुदाय से चुनाव लड़े वला मुन्ना पूरे बिहार में एकलौता उम्मीदवार बाड़े. मुन्ना किन्नर बहुत पहिले से राजनीत में बाड़े. उ 2007 में जिला परिषद के चुनाव लड़ल रहन लेकिन जीत ना पाइले . एकरा बाद 2015 में हथुआ से जिला पार्षद चुनल गइले. मुन्ना पब्लिक के हक में आवाज उठावे खातिर मशहूर बाड़े. मुन्ना के चुनाव लड़े से हथुआ के फाइट बहुत टाइट हो गइल बा.

पूर्व मंत्री रो रो के मांग रहल बाड़े भोट

बिहार चुनाव में अइसनो नेता बाड़े जे भोट खातिर रो-रो के जनता से हथजोड़िया कर रहल बाड़े. रोअला-धोअला से कहीं भोट मिलेला ? लेकिन लगातार हार से लचार नेता जी के इहे बुझाता कि अब आंख के लोरे से जिनगी अंजोर होई. उ रो-रो के अइसे भोट मांग रहल बाड़े जइसे कवनो लइका झुनझुना मांगत होखे. इन नेता जी नाम हs हिमराज सिंह. हिमराज सिंह कटिहार के कदवा से चुनाव लड़ रहल बाड़े. उ राबड़ी सरकार में मंतरियो रहल बाड़े. 2000 के विधानसभा चुनाव में हिमराज सिंह कदवा से निरदलीय जीतल रहन. ओह चुनाव में कवनो पाटी के बहुमत ना मिलल रहे. नीतीश कुमार साते दिन के बाद मुखमंतरी पद से इस्तीफा दे देले रहन. एकरा बाद राबड़ी देवी कांगरेस अउर निर्दलीय के मदद से सरकार बनवली. हिमराज सिंह के किसमत चमक गइल. राबड़ी सरकार में उ पथ निरमान मंत्री बनले. लेकिन एकरा बाद हिमराज सिंह कदवा से दोहरिया के ना जितले. 2005, 2010 अउर 2015 में लगतार तीन चुनाव हारे से हिमराज सिंह के धीरज डोल गइल. 2020 में अब उ रो-धो के जनता से भोट देवे के निहोरा कर कर रहल बाड़े.

कुर्ताफाड़ चुनाव परचार

रोसड़ा के कांग्रेस कंडिडेट नागेनदर कुमार विकल के हाल देख के तs लोग दांत तरे अंगुरी दबावे लागल. रोसड़ा के बहुत दिन से जिला बनावे के मांग हो रहल बा. जनता के दिल में जगह बनावे खातिर नागेनदर विकल कुरता फाड़ के किरिया खइले बाड़े कि जब ले रोसड़ा जिला ना बन जाई तब ले उ कुरता ना पेन्हिएं. खाली धोती पेन्ह के रहिहें. 2015 में एह सीट पs कांग्रेस के अशोक कुमार जीतल रहन. उहो रोसड़ा के जिला बनावे के वादा कइले रहन. वादा पूरा ना भइल. जनता के विरोध से डेरा के अशोक कुमार रोसड़ा छोड़ के कुसेसर स्थान चल गइले. अब नागेनदर विकल से पब्लिक सवाल पूछ रहल बा कि कांग्रेस पs केहू कइसे भरोसा करी ? एह सवाल से उबिया के एक दिन नागेनदर भरले सभा में आपन कुर्ता फाड़ देले. ई देख के लोग चिहा गइल कि अचके में विकलजी कुर्ता काहे फारे लगले ? जब नेताजी एलान कइले कि उ कुरता फार के रोसड़ा के जिला बनावे खातिर किरिया खा रहल बाड़े तब जाके लोग के लोग के सबूर भइल कि कवनो गड़बड़ी वला बात नइखे. भोट खातिर नेता लोग कवन कवन भेस धरिहें, केहू नइखे जानत.