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प्रतापगढ़। बेल्हा की सियासत मे जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में एक बार फिर प्रमोद तिवारी के समर्थन का सिक्का चमचमा उठा दिखा

बेल्हा की सियासत में फिर चमका प्रमोद तिवारी का सियासी सिक्का
राजा भइया समर्थित उम्मीदवार की ताजपोशी में दिग्गज कांग्रेस नेता का सिग्नल रहा निर्णायक*
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प्रतापगढ़। बेल्हा की सियासत मे जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में एक बार फिर प्रमोद तिवारी के समर्थन का सिक्का चमचमा उठा दिखा। कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी के कददावर राजा भइया समर्थित जनसत्ता दल लोकतांत्रिक की उम्मीदवार माधुरी पटेल के समर्थन की घोषणा के बाद भी जिले की सियासत मे चुनाव परिणाम को लेकर सत्तारूढ भाजपा समेत विपक्षी खेमे मे खलबली मच गयी। प्रमोद तिवारी ने बारह के बारह सदस्यों का एकमुश्त समर्थन का जैसे ही राजा भइया समर्थित प्रत्याशी माधुरी पटेल के समर्थन में आंकडा जुटाया। उसी समय राजनीतिक विश्लेषको ने सियासत के महारथी प्रमोद तिवारी के समर्थन से निकलने वाले इस परिणाम को भांप लिया था। अपनी विधायक बेटी एवं मौजूदा कांग्रेस विधानमण्डल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना के निर्वाचन क्षेत्र रामपुरखास में कई विकास योजनाओ मे भाजपा के जिलास्तरीय जनप्रतिनिधि द्वारा अडंगा लगाने से खार खाये प्रमोद तिवारी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भाजपा को रामपुर खास के जनाकांक्षा के विरोध की पूरी तरह से कीमत बताने मे भी कामयाब रहे। प्रमोद तिवारी को रामपुरखास मे ट्रामा सेंटर के संचालन मे बाधा के साथ उदयपुर मंगापुर ब्लाक के शुरू न हो पाने और लालगंज टाउन एरिया को आदर्श टाउन एरिया न बन पाने को लेकर जिले स्तर पर भाजपा की अडंगेबाजी नागवार गुजरी। वहीं जिला पंचायत के चुनाव मे प्रमोद तिवारी समर्थित उम्मीदवार भाजपा समर्थित उम्मीदवारो को रिकार्ड मतो से पटखनी दे चुके थे। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री राजा भइया भी वक्त की नब्ज को अब बखूबी टटोलने मे माहिर माने जाते है। राजा भइया ने जिला पंचायत चुनाव मे रामपुरखास मे कांग्रेसी उम्मीदवारो की जीत की राह मे कतई दखलनदाजी का दूरदर्शी निर्णय भी लिया था और इसके चलते रामपुरखास मे जनसत्ता दल लोकतांत्रिक का एक भी उम्मीदवार मैदान में उतारने से भी परहेज किया। इधर जिला पंचायत चुनाव में भाजपा ने प्रमोद तिवारी की घेराबंदी करने की भरपूर कोशिश की। हालांकि यह कोशिश उसे इतना कसैला स्वाद दे गई कि प्रमोद तिवारी के समर्थक जिला पंचायत सदस्य तो रिकार्ड मतों से जीत गये। वहीं भाजपा को रामपुरखास में अपने कददावर प्रत्याशी की हार का भी कडवा स्वाद चखना पडा। हालात कुछ ऐसे बने कि प्रमोद तिवारी का राजनीतिक निर्णय राजा भइया के साथ जुगलबंदी का मुफीद हुआ। बेल्हा की सियासत मे प्रमोद तिवारी को करिश्माई माना जाता है। इधर पूर्व मंत्री राजा भइया का भी जिले की सियासत मे अपना एक अलग वर्चस्व है ऐसे मे जिले के दोनों दिग्गजो का जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव मे हुआ गठबंधन भाजपा का तो सूपडा साफ कर गया। वहीं राजा भइया और प्रमोद तिवारी समर्थित माधुरी पटेल को एकतरफा जीत का सेहरा हाथ मे लग गया। चुनाव परिणाम आने के बाद जिले की सियासत मे हर गली हर कोने चर्चा भी और चटखारी हो उठी कि दिग्गज प्रमोद तिवारी का सिग्नल चुनाव परिणाम का सही सिग्नल साबित हो ही उठा।
डा0आर.आर.पाण्डेय प्रतापगढ़