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झारखंड कांग्रेस के विधायक नाराज़, राज्य के सीनियर नेताओं से चाहते हैं सीधी बात

रांची. झारखंड में कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व से ​कांग्रेस विधायकों ने साफ शिकायत की है कि वो ‘प्रशासन के असहयोग’ के शिकार हो रहे हैं. झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश ठाकुर समेत राज्य के सीनियर कांग्रेस नेताओं से इन नाराज़ विधायकों ने मांग की है कि उनकी गुहार सुनी जाए और सटीक कार्रवाई की जाए. इन विधायकों ने सीधा आरोप लगाया है कि राज्य सरकार में जो मंत्री हैं, वो विधायकों के विधानसभा क्षेत्रों की समस्याओं को सुलझाने के लिए गंभीर रवैया नहीं अपना रहे हैं.

“भले ही सरकार के खिलाफ हो, लेकिन हम उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका देंगे. समस्याओं को सुनकर उनका ठीक ढंग से निदान किया जाएगा.” यह बात कहते हुए ठाकुर ने बताया कि विधायकों ने उन्हें और प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव के पास अपनी शिकायतें भेजी हैं. ठाकुर ने उम्मीद जताई कि ये ​तमाम मुद्दे राज्य प्रभारी के सामने भी रखे जाएंगे. एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ठाकुर ने कहा, चूंकि आरपीएन सिंह पार्टी के प्रदेश प्रभारी हैं इसलिए उनके साथ एक बैठक जल्द रखी जाएगी. ज़रूरी हुआ तो उरांव या फिर सरकार में मंत्रियों के पास शिकायतें भेजी जाएंगी.

कांग्रेस के विधायकों ने झारखंड में पार्टी के आला नेताओं से समस्याएं सुलझाने के लिए मुलाकात की मांग की है.

क्या ये राज्य सरकार में दरार के संकेत हैं?
झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की झामुमो और कांग्रेस के बीच मुख्य गठबंधन की सरकार है. इस ताज़ा घटनाक्रम से ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि गठबंधन सरकार के बीच मतभेद उभर रहे हैं. हाल में, कांग्रेस विधायकों ​दीपिका पांडे सिंह, ममता देवी और पूर्णिमा नीरज सिंह ने अपनी शिकायतें कांग्रेस विधान परिषद के पार्टी नेता आलमगीर आलम के सामने रखी थीं. आलम ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि इन नेताओं ने मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिया गया कि उनकी शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंचेंगी, हल भी निकलेगा.

क्यों नाराज़ हैं विधायक? क्या चाहते हैं?
वास्तव में, विधायकों का कहना है कि झामुमो के नेतृत्व में राज्य सरकार में कांग्रेस की हिस्सेदारी के बावजूद सरकारी स्तर पर ​विधायकों की समस्याओं को सुना नहीं जा रहा, न ही उनके विधानसभा क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण काम करवाने में सहयोग मिल रहा है. हाल में, आलम के साथ बैठक के बाद दीपिका पांडे सिंह ने कहा था, ‘हमारे कार्यकाल का डेढ़ साल गुज़र चुका है और हम अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति जवाबदेह हैं. एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तो होना ही चाहिए ताकि गठबंधन सरकार में हर काम के लिए सामंजस्य और निगरानी तय हो सके.’