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Jharkhand: उलझता दिख रहा SC/ST प्रोन्नति मामला, सत्ताधारी विधायकों ने ही उठाए सवाल

रांची. झारखंड में एससी, एसटी प्रोन्नति मामला सुलझने की जगह और उलझता दिख रहा है. हालांकि राज्य सरकार ने इसको सुलझाने के लिए तीन सदस्यों की कमिटी भी बनाई थी लेकिन अब सत्ताधारी विधायक ही कमेटी पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि ये मामला लगातार खींचा जा रहा है और इसमें लटकाए रखने से ज्यादा और कुछ भी नहीं है.
मेरिट के आधार पर लंबित प्रोन्नति को लेकर विधानसभा की विशेष समिति की रिपोर्ट फरवरी माह में सौंपे जाने के बाद भी आज तक कुछ नहीं हुआ. विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो को सौंपी गई 365 पेज की रिपोर्ट में लंबित प्रोन्नति से संबंधित हर बात उल्लेख था. वरीयता सह पात्रता के आधार पर प्रोन्नति की मांग उठ रही है . राज्य सरकार के द्वारा इसको लेकर नियामवाली बन जाने के बाद हजारों सरकारी कर्मियों को इसका लाभ मिलेगा. झारखंड एससी, एसटी कर्मचारी संघ लगातार प्रौन्नति को लेकर आवाज बुलंद कर रहा है और उसके पास अपने आधार भी है .

कब क्या हुआ…

1995 आर के सबरवाल के जजमेंट से मामले की शुरुआत हुई.

पहले रिक्ति आधारित रोस्टर लागू था.

आर के साबरवाल में पद आधारित रोस्टर का उल्लेख.

रिजर्वेशन का दायरा उसी वक्त 50 प्रतिशत तय कर दिया गया था.

50 प्रतिशत अनारक्षित में कौन होंगे इसका साफ उल्लेख.

वरीयता सह पात्रता के आधार पर सामान्य वर्ग से ऊपर वालों को अनारक्षित में रखना है और उन्हें प्रोन्नति देनी होगी.

अनारक्षित वो जो मेरिट के आधार पर आएंगे.

बाद में अनारक्षित का मतलब जाति का रूप दे दिया गया, जबकि ये ओपन टू ऑल था.

18 अप्रैल 2007 को कार्मिक विभाग की कार्यवाही में इसका साफ तौर पर उल्लेख.

तो नहीं खत्म होगा मामला
एससी, एसटी प्रोन्नति का मामला मांडर विधायक बंधु तिर्की ने सदन में उठाया था. बंधु तिर्की के सवाल पर ही विधानसभा की विशेष समिति बनाई गई थी. समिति की रिपोर्ट के बाद फिर से एक तीन सदस्यों वाली कमिटी के निर्माण से बंधु तिर्की नाराज है. उनका साफ तौर पर कहना है कि ये सिर्फ-सिर्फ मामले को लटकाने जैसा है. राज्य के अधिकारी मुख्यमंत्री को भ्रमित करने का काम कर रहे है. अगर सरकार इसमें उलझती है, तो इस मामले का खत्म किया जा सकेगा.