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राजस्थान के ग्रामीणों के हौसले को सलाम, सरकारी सहायता के बिना बना डाला 45 लाख का बांध

बूंदी. अगर कुछ कर गुजरने के इरादे मजबूत (Strong intentions) हो तो राह में आने वाली सभी मुश्किलों को दूर कर मंजिल हासिल की जा सकती है. ऐसा ही एक कुछ कर दिखाया है बूंदी (Bundi) जिले के नैनवां उपखंड क्षेत्र के बामन गांव पंचायत क्षेत्र के 13 गांवों के ग्रामीणों ने. उन्होंने बिना किसी सरकारी सहायता और इंजीनियरों के क्षेत्र का जलस्तर सुधारने के लिए जनसहयोग से 45 लाख की राशि एकत्रित कर भोमपुरा गांव के पास लंबा चौड़ा बांध (Dam) बना डाला. बांध बनाने के लिये ग्रामीणों ने अपनी 350 बीघा जमीन दांव पर लगा दी. बांध के लिये ग्रामीणों ने 29 दिनों तक रात दिन निर्माण कार्य चलाया.

निरंतर गिरते जा रहे भूजल स्तर के कारण डार्क जोन की श्रेणी में शामिल बामन ग्राम पंचायत क्षेत्र के लोगों ने अपनी खाते की 350 बीघा जमीन दांव पर लगाकर उस पर जनसहयोग से एकत्रित की गई 45 लाख की राशि से बांध बना कर सफलता की कहानी में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. इस क्षेत्र में लगातार गिरते जा रहे भूजल स्तर के कारण पानी 800 फीट गहरा पहुंच गया. ग्रामीण पीने के पानी के लिए दर दर भटकने पर मजबूर हो गए. इससे परेशान होने पर ग्राम पंचायत क्षेत्र में भोमपुरा हीरापुर, लालगंज, खेरुणा, बागड़ा. नाथड़ा, नाथड़ी, गुढादेवजी, गावड़ी, भवानीपुरा और करीरी सहित 13 गांवों के लोगों ने बांध बनाने की ठानी. इसको उन्होंने पूरा भी कर दिखाया.

13 गांवों के ग्रामीणों की पंचायत
इस सबंध में पूर्व सरपंच राधा किशन गुर्जर, छोटू लाल गुर्जर, सत्यनारायण भाटी, गजानंद गुर्जर और सत्यनारायण नागर ने बताया कि बरसाती नाले पर बांध बनाने विचार आने के बाद 13 गांवों के ग्रामीणों की पंचायत बुलाई गई. इसमें शामिल पंच पटेलों ने बरसाती नाले को रोक कर बांध बनाने का फैसला लिया. इसके साथ साथ बांध के डूब क्षेत्र में आने वाली 350 बीघा भूमि के मालिक किसानों से सहमति लेने के लिए समझाइश की गई.

ग्रामीणों ने यूं एकत्र की धनराशि
लगातार गिरते जा रहे भूजल स्तर के कारण परेशान किसानों ने अपनी खाते की 350 बीघा भूमि पर बांध बनाने की सहमति दे दी. इससे बांध बनाने का मार्ग प्रशस्त हो गया. इसके बाद क्षेत्र के लोगों द्वारा मंदिर बनाने के लिए एकत्रित की गई 19 लाख रुपये की राशि और सरसों की फसल की तूड़ी को सामूहिक रूप से बेचकर 15 लाख की राशि एकत्र की गई. इसके अलावा 11 लाख की और राशि जनसहयोग से एकत्रित कर बांध बनाया गया है.

6 जेसीबी मशीनों और 46 ट्रैक्टर ट्रोलियां लगाई
बांध बनाने के लिये ग्रामीणों ने जी तोड़ मेहनत की. इसके लिये 6 जेसीबी मशीनों और 46 ट्रैक्टर ट्रोलियों के सहयोग से क्षेत्र के लोगों ने तपती गर्मी में शिफ्टों में खुद शारीरिक श्रम करते हुए बांध निर्माण के कार्य की निगरानी की. इसके बाद 29 दिनों में 2050 फीट लंबा, 80 फीट चौड़ा और 29 फीट ऊंचा मिट्टी की पाल वाला बांध बनकर तैयार हो गया.