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अयोध्या,यूपी- राम मंदिर की बुनियाद के लिए खुदाई का काम शुरू

अयोध्या. श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में भव्य मंदिर निर्माण को लेकर आखिरकार वह शुभ घड़ी आ ही गई, जिसका सभी को इंतजार था। शुक्रवार सुबह से गर्भगृह पर पहले टेस्ट पिलर की ढलाई शुरू की गई। जन्मभूमि परिसर में यह पिलर तैयार होने के बाद यहां विशेषज्ञ इसे मजबूती की कसौटी पर परखेंगे और सब कुछ ठीक पाए जाने के बाद इसी तरीके के 12 सौ और पिलर तैयार किये जाएंगे। जिन पर राम मंदिर की नींव रखी जाएगी। टेस्ट पिलर सौ फीट गहरा और एक मीटर व्यास का होगा। इस पिलर में भरने के लिए कंक्रीट फिलहाल बाहर से मंगाया जा रहा है। पिलर की ढलाई के गड्ढे खोदने का काम शुरू करने के साथ ही बाकी पिलर के लिए गड्ढे खोदने का काम भी चल रहा है। आपको बता दें कि परिसर में रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए कुल 1200 पिलर बनने हैं। गड्ढों को 700 फीट की गहराई तक कुएं की शक्ल में खोदकर उसमें पाइलिंग का काम किया जाएगा।

वहीं श्रीराम जन्मभूमि परिसर में निर्माण एजेंसी का बैचिंग प्लांट अभी तैयार नहीं हो सका है। उसके लिए वैकल्पिक गर्भगृह के पीछे फाउंडेशन तैयार किया जा रहा है। इस काम में अभी लगभग एक हफ्ते का समय लगने की संभावना है। सैकड़ों फीट नीचे तक खुदाई करने के लिए दो रिंग मशीनें परिसर में पहुंच चुकी हैं, जबकि अभी इतनी ही मशीनें और आएंगी। मंदिर की नींव की मजबूती को लेकर खास सतर्कता बरती जा रही है। दरअसल श्रीराम जन्मभूमि का मकसद मंदिर की नींव को इतना मजबूत बनाया जाना है कि वह करीब डेढ़ हजार साल तक एकदम अडिग रहे। राम नगरी में इस काम की निगरानी आईआईटी चेन्नई के साथ ही देश के कई दूसरे चुनिंदा जानकार कर रहे हैं। इसी नींव पर 161 फीट ऊंचा भव्य मंदिर बनाया जाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि मंदिर का निर्माण तीन से साढ़े तीन सालों में पूरा हो जाएगा।

हाईपावर कनेक्शन का संकट

राम मंदिर निर्माण के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें अयोध्या पहुंच गईं हैं। अब प्रशासन के सामने इतनी बड़ी मशीनों को चलाने के लिए हैवी पावर कनेक्शन देने का संकट है। इसे लेकर अब ट्रस्ट के सदस्यों और लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) की टीम निर्माण में लगने वाली जरूरतों का आकलन कर उसे पूरा करने में जुटी है। कारसेवक पुरम में ट्रस्ट के पदाधिकारियों और एलएंडटी की इंजीनियरिंग टीम के बीच मंथन में तय किया गया कि अब मंदिर निर्माण के लिए अपना पावर कनेक्शन, पानी के लिए ओवरहेड टैंक, सीवर सिस्टम की व्यवस्था की जाएगी। एलएंडटी के इंजीनियरों के मुताबिक, मशीनों के संचालन के लिए हाईपावर कनेक्शन की जरूरत पड़ेगी। इसी के हिसाब से केवल मंदिर निर्माण के मकसद का ट्रांसफार्मर भी लगेगा। अब हाई पावर कनेक्शन लेने के लिए पावर कारपोरेशन में अप्लाई किया जाएगा।