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बजट के अनुमान से दोगुना बढ़ सकता है राजकोषीय घाटा, सरकार की आमदनी कम, खर्च ज्यादा

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2020-21 में भारत का राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) कुल सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 7 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है. बजट में इसका अनुमान 3.5 फीसदी तक का लगाया गया था. लेकिन कोरोना वायरस महामारी (Corona Virus Pandemic) की वजह से रेवेन्यू कलेक्शन (Revenue Collection) को झटका लगा है और आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं. बिक्रवर्क रेटिंग्स (Brickwork Ratings) ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है. इस एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिवि​धियां ठप पड़ने का असर रेवेन्यू कलेक्शन पर पड़ा है. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़ों से इस बारे में साफ पता चलता है.’

इनकम टैक्स और जीएसटी रेवेन्यू में गिरावट
कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में देखें तो रेवेन्यू कलेक्शन को बड़ा झटका लगा है. इनकम टैक्स (Income Tax) के जरिए प्राप्त होने वाले रेवेन्यू में 30.5 फीसदी की कमी आई है. इसमें व्यक्तिगत इनकम टैक्स और कॉरपोरेट इनकम टैक्स शामिल है. जबकि, इस दौरान वस्तु एवं सेवा कर (GST) के जरिए प्राप्त होने वाले रेवेन्यू में 34 फीसदी की गिरावट है.

दूसरी तरफ, आत्मनिर्भर भारत प्रोग्राम (Atmnirbhar Bharat Program) के तहत आम जनता पर किए गए खर्च में 13.1 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है. एजेंसी का कहना है यही कारण है कि बजट में रखे गये लक्ष्य की तुलना में पहली तिमाही के दौरान राजकोषीय घाटे में करीब 83.2 फीसदी का अंतर है.

तीसरी तिमाही में बेहतर हालात का अनुमान
ब्रिकवर्क रेटिंग्स ने अपनी इस रिपोर्ट में कहा है ​कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से अर्थव्यवस्था में सुधार होना शुरू होगा. कारोबारी गतिविधियों की जल्दी शुरुआत होने से उम्मीद की जा रही रहै कि तीसरी तिमाही में रेवेन्यू कलेक्शन कोरोना काल के पहले के स्तर पर पहुंच जाएगा. इस बीच फेस्टिव सीजन की वजह से खपत बढ़ने से मांग बढ़ेगी और लोग ज्यादा खर्च करने की​ स्थिति में होंगे.

हालांकि, अगर मौजूदा स्थिति लंबे समय के लिए रहती है तो सरकार के पास फंड की कमी की समस्या खड़ी हो सकती है. पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में कटौती के साथ केंद्र सरकार की कई स्कीम्स पर होने वाले खर्च में कमी हो सकती है. इसमें मनरेगा (MNREGA) और नेशनल हेल्थ मिशन (National Health Mission) जैसी स्कीम्स हैं. आत्मनिर्भर प्रोग्राम के तहत सरकार ने पहले ही मनरेगा के लिए 40 हजार करोड़ रुपये अतिरि​क्त आवंटित करने का ऐलान किया था. इस फंड को चालू वित्त वर्ष में ही इस्तेमाल किया जाएगा.

12 फीसदी तक पहुंच सकता है समेकित राजकोषीय घाटा
अगर अर्थव्यवस्था में पहले की तुलना से ज्यादा संकुचन होता हे तो अतिरिक्त उधार लेने से भी राजकोषीय घाटे पर असर पड़ेगा. चूंकि, राज्यों को भी GDP के 2 फीसदी तक अतिरिक्त उधार लेने की अनुमति दे दी गई है, ऐसे में समेकित राजकोषीय घाटा जीडीपी के 12 फीसदी तक पहुंच सकता है. प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को देखें तो केवल अमेरिका का राजकोषीय घाटा ही इससे अधिक है.