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जयपुर- जिला परिषद के चुनाव जीतने के लिए गहलोत सरकार को करनी होंगी राजनीतिक नियुक्तियां, जानिए क्या है वजह

जयपुर. राजस्‍थान की 3848 ग्राम पंचायतों के चुनाव (Panchayat elections) कार्यक्रम की घोषणा होते ही अब अशोक गहलोत सरकार (Ashok Gehlot Government) पर अब राजनीतिक नियुक्तियां देने का दबाव बनने लगा है. इसके पीछे प्रमुख कारण है कि आयोग की ओर से जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव अलग से कराने की घोषणा. आयोग ग्राम पंचायत चुनाव के बाद प्रदेश में 33 जिला परिषद और 365 से अधिक पंचायत समितियों के चुनाव की कभी घोषणा कर सकता है.

जिला परिषद के चुनाव जीतना सबसे बड़ी चुनौती
सियासी संकट के बाद गहलोत सरकार के सामने जिला परिषद पंचायत, पंचायत समितियों एवं स्थानीय निकाय के चुनाव जीतना सबसे बड़ी चुनौती है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पायलट के दो धड़ों में बंटने के बाद इसका असर निचले स्तर पर पड़ा है. इसे तात्कालिक तौर पर काबू करने के लिए पार्टी ने भले ही प्रदेश स्तर तक की तमाम कार्यकारिणी एवं समितियों को भंग कर दिया हो, लेकिन कांग्रेस के तमाम कार्यकर्ता फिलहाल बिना किसी पद के अपने क्षेत्र में बैठे हैं. इसका सीधा असर उनके क्षेत्र में पार्टी की सक्रियता पर पड़ रहा है.
जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव पार्टी के सिंबल के आधार पर होते आए हैं. जिला परिषद और पंचायत समितियों के चुनाव जीतने के लिए सीएम अशोक गहलोत को ब्लॉक स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं को उपकृत करना होगा तभी वो सक्रिय होंगे. इन संस्थाओं में चुनाव जीतने के लिये छोटे स्तर पर राजनीतिक नियुक्तियां और संगठन में जगह देकर पार्टी को इसकी शुरुआत करनी होगी. राज्य में कांग्रेस की सरकार को बने हुए करीब पौने 2 साल बीत चुके हैं. चुनाव के दौरान कार्यकर्ताओं को सरकार बनने के बाद सत्ता में हिस्सेदारी देने के वादे किए गए थे. लेकिन सरकार अभी तक वह वादा पूरा नहीं कर पायी है. अब पार्टी और सरकार दोनों पर वादे को पूरा करने का दबाव है.