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गोण्डा यूपी – अब आशा फोन पर लेंगी आपके लाल का हाल-चाल

गोण्डा यूपी अब आशा फोन पर लेंगी आपके लाल का हाल-चाल

कंटेन्मेंट जोन में फोन से व नॉन कंटेन्मेंट जोन में घर जाकर एचबीएनसी फॉलोअप करेंगी आशा

गोण्डा। कंटेन्मेंट जोन में निवास करने वाले नवजात शिशुओं का गृह आधारित नवजात देखभाल (एचबीएनसी) फॉलो अप आशा कार्यकर्ताओं द्वारा फोन के माध्यम से किया जायेगा। यह कहना है जिला सामुदायिक प्रक्रिया प्रबंधक डॉ आरपी सिंह का। उन्होंने बताया कि परिवार कल्याण महानिदेशक डा. मिथलेश चतुर्वेदी ने सूबे के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को पत्र भेजकर यह निर्देश जारी किया है।
डॉ आरपी सिंह ने पत्र का हवाला देते हुए कहा कि फोन के मध्यम से फॉलो अप में आशा स्वयं कम वजन वाले बच्चों या समय से पूर्व जन्मे बच्चों या सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) से डिस्चार्ज हुए बच्चों या घरेलू प्रसव को प्राथमिकता देते हुए सभी नवजात शिशुओं के परिवारों को परामर्श देंगी। वह ही शिशु के स्वास्थ्य (खतरे के लक्षण) जैसे सुस्ती, बेहोशी, छूने पर ठंडा गर्म, स्तनपान आदि के बारे में पूछेंगी। यदि प्रसव अस्पताल में हुआ है, तो जन्म के समय बच्चे के वजन के बारे में भी पूछेंगी। इस दौरान वह माँ और परिवार को प्रसव के बाद महिला व शिशु में होने वाले खतरे के लक्षणों के बारे में बतायेंगी तथा परिवार वालों बातचीत कर इस बात का आंकलन करेंगी कि नवजात को संदर्भन की जरूरत तो नहीं है। वह माँ और परिवार को केवल स्तनपान, कपड़े में लपेट कर कंगारू मदर केयर देने के बारे में सलाह देंगी। साथ ही में आशा कार्यकर्ता यह भी सलाह देंगी कि यदि नवजात में किसी तरह के खतरे के लक्षण दिखें तो वह आशा और ब्लाक कम्युनिटी प्रोसेस मैनजर ( बीसीपीएम) को सूचित करें और 102 एम्बुलेंस द्वारा वह बच्चे को संदर्भित कर आवश्यक सेवाएं दें।
नॉन कंटेन्मेंट जोन में एचबीएनसी का गृह भ्रमण आशाओं द्वारा सामजिक दूरी रखते हुए बिना स्पर्श किये हुए मास्क पहन कर एवं हाथों को उचित तरीके से साबुन व पानी के साथ धोने से किया जाएगा। इस दौरान वह माँ और शिशु को नहीं छुएंगी। वह माँ और परिवार से ही शिशु के स्वास्थ्य (खतरे के लक्षण) जैसे-सुस्ती, बेहोशी, छूने पर ठंडा गर्म, स्तनपान आदि के बारे में पूछेंगी। साथ ही उपरोक्त बताई गयी सलाह को माँ और परिवार वालों को देंगी। डॉ आरपी सिंह ने बताया कि जिले की 3046 आशाओं को नवजात शिशुओं के देखभाल का तरीका अलग-अलग कई प्रशिक्षणों के माध्यम से सिखाया गया है। प्रशिक्षित आशाएं गृह भ्रमण के दौरान नवजात शिशुओं की अन्य देखभाल के साथ-साथ सांसों की गिनती भी करती हैं। इसके लिए विभाग द्वारा इन्हें डिजिटल घड़ी भी उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि एक मिनट मे ली गयी साँसों की गति तेज होने पर आशाएँ नवजात शिशु को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर रेफर करती हैं।
साँसों की गिनती बताएगी नवजात का हाल :
जिला महिला अस्पताल में तैनात नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ रामलखन का कहना है कि प्रारम्भिक अवस्था में ही नवजात शिशुओं मे होने वाली बीमारी की पहचान कर उन्हें गंभीर होने से बचाया जा सकता है द्य शिशु द्वारा एक मिनट मे ली गयी साँसों की गिनती से हम उसकी बीमारी को शुरुआत में ही पहचान सकते हैं।
डॉ राम लखन के अनुसार, जन्म से दो महीने तक के नवजात शिशुओं की एक मिनट मे ली गयी सांसें 60 या 60 से अधिक है, तो शिशु की सांस तेज है और उसे इन्फेक्शन (गंभीर जीवाणु संक्रमण) की संभावना हो सकती है द्य ऐसे शिशुओं को तुरंत उपचार की आवश्यकता होती है। बीमार शिशु बड़े बच्चों की तुलना मे कुछ अलग होते हैं द्य इनमें अक्सर सुस्त पड़ना, शरीर का कम तापमान या बुखार जैसे आम लक्षण ही दिखाई देते हैं। तेज सांस, शिशुओं मे गंभीर बीमारी का संकेत है। ऐसे शिशु, सामान्य शिशुओं की तरह दिखाई दे सकते हैं, लेकिन उपचार न मिलने पर इनकी स्थिति गंभीर हो सकती है और कुछ घंटों या दिनों में इनकी मृत्यु भी हो सकती है। इन्हीं कारणो से नवजात शिशुओं की देखभाल अलग ढंग से की जाती है।