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MP के 28 जिलों में 73 हजार मीट्रिक टन घटिया चावल की सप्लाई! कमलनाथ ने की CBI जांच की मांग

भोपाल. मध्य प्रदेश के आदिवासी जिले मंडला (Mandla ) और बालाघाट (Balaghat) में इंसानों को जानवरों को दिया जाने वाला चावल परोसे जाने के मामले को लेकर अब नई जानकारी सामने आई है. राज्य सरकार के कलेक्टरों को दिए गए निर्देश और जानकारी में यह बात सामने आई है कि प्रदेश के 28 जिलों में 73 हजार मीट्रिक टन चावल अमानक यानी कम गुणवत्ता वाला (Non-Standard Rice) निकला है. राज्य सरकार ने कलेक्टरों को इस चावल के वितरण पर रोक लगाते हुए मिलर्स को वापस भेजने के निर्देश दिए हैं. साथ ही राज्य सरकार ने मिलर्स से गुणवत्ता वाला चावल लेकर अगले एक हफ्ते में सप्लाई और वितरण सुनिश्चित करने को कहा है.

वहीं इस पूरे मामले में सरकार के निर्देशों पर अब सियासत ने जोर पकड़ लिया है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस पूरे मामले को सीबीआई को सौंपने की मांग की है. कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को पूरा मामला सौंपना जरूरी है, ताकि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाए. कमलनाथ ने आशंका जताई है कि इस घोटाले को डायवर्ट करने की कोशिश हो रही है. कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा है कि प्रदेश में कहीं चावल घोटाला, कहीं गेहूं में मिलावट, कहीं यूरिया में फर्जीवाड़ा निकल कर सामने आ रहा है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली से गरीबों में बॆटने वाला चावल पोल्ट्री ग्रेड का होने का मामला बालाघाट, मंडला तक सीमित नहीं है. इसके तार पूरे प्रदेश से जुड़ते हुए नजर आ रहे हैं. यह एक बड़ा घोटाला है इसमें बड़ी मिलीभगत सामने आ रही है. पूरे प्रदेश में गरीबों को बांटने वाले चावल के साथ दूसरे सामग्री की भी जांच होनी चाहिए.
शिवराज सरकार में ये क्या हो रहा है ?प्रदेश में कही चावल घोटाला, कही गेहूं में मिलावट, कही यूरिया वितरण में फ़र्ज़ीवाडा ?सार्वजनिक वितरण प्रणाली से ग़रीबों को बटने वाला चावल पोल्ट्री ग्रेड का होने का मामला सिर्फ़ बालाघाट व मंडला तक ही सीमित नहीं है,

बीजेपी ने साधा कांग्रेस पर निशाना
तो वहीं बीजेपी ने भी गरीबों में घटिया क्वालिटी का चावल परोसे जाने पर पूर्व की कमलनाथ सरकार पर निशाना साधा है. कैबिनेट मिनिस्टर भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि सरकार की जानकारी में आया है कि इस चावल की खरीदी तत्कालीन कमलनाथ सरकार के समय हुई थी. फरवरी में हुई इस खरीदी के मामले में इंटेलिजेंस इनपुट भी सामने आया था, जिसकी जानकारी तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को थी. बावजूद इसके इस पर कोई एक्शन नहीं हुआ. बीजेपी सरकार की जानकारी में आने के बाद पूरे मामले पर जांच हो रही है और जो भी दोषी निकलेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

गेहूं पर भी सवाल
बहरहाल, प्रदेश में अब चावल के साथ ही गेहूं की क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. खबर इस बात को लेकर भी है कि सड़ा हुआ गेहूं राशन दुकानों से गरीबों को बांटा गया है. गरीबों की थाली में पहुंचने वाले अनाज की क्वालिटी से इस बात का साफ पता चलता है कि प्रदेश में बड़े स्तर पर अनाज घोटाला हुआ है जिसमें सरकारी अफसर से लेकर बड़े सप्लायर्स शामिल हैं. इसको लेकर हो रही सियासत भी फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही है. जैसे-जैसे नई जानकारियां सामने आ रही हैं वैसे-वैसे सियासत भी तेज होती हुई दिख रही है.