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लखनऊ…तो COVID-19 से जंग में कहीं कमजोर पड़ गई टीबी से लड़ाई, नहीं हो पा रही मरीजों की पहचान

लखनऊ. यदि आपको भी खांसी के साथ बुखार आ रहा है और जांच में आप कोविड (COVID-19) निगेटिव हैं तो निश्चिंत होना घातक हो सकता है. बहुत संभव है कि आपको कोरोना का नहीं बल्कि टीबी का इंफेक्शन (TB Infection) हो गया हो. इसीलिए लंबे समय तक खांसी और बुखार आ रहा हो तो टीबी की जांच करवाना जरूरी है. कोविड से लड़ाई में कहीं न कहीं टीबी की लड़ाई कमजोर पड़ी है. टीबी से मुकाबले के लिए जो भी व्यवस्थायें थीं उन्हें कोविड में लगा दिया गया है. यही वजह है कि पिछले साल की तुलना में इस साल 1 लाख कम टीबी के मरीजों की पहचान हो पायी है.

खतरे को भांपकर स्वास्थ्य विभाग ने अब नयी जंग छेड़ने का एलान किया

दबे पांव बढ़ते इस खतरे को भांपकर स्वास्थ्य विभाग ने अब नयी जंग छेड़ने का एलान किया है. अब ऐसे सभी लोगों की टीबी की जांच करायी जायेगी जो कोविड पॉजिटिव तो नहीं है लेकिन, जिन्हें लम्बे समय से खांसी और बुखार आ रहा है. राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि “हर जिले में ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है और उनकी टीबी की जांच करायी जा रही है. कई जिलों में ये शुरु भी हो गया है.” खास बात ये है कि जिन जिलों में ऐसी जांचें शुरु हुई हैं वहां कोविड निगेटिव मरीज टीबी के पॉजिटिव पाये जा रहे हैं.

यूपी में सबसे ज्यादा टीबी मरीज
कोरोना से लड़ाई के दौरान सबसे ज्यादा किसी संक्रामक बीमारी का खतरा बढ़ा है तो वह है टीबी, क्षय रोग. पूरी दुनियां की बात करें तो भारत में और देश की बात करें तो यूपी में इसके सबसे ज्यादा मरीज हैं. जिन संक्रामक बीमारियों से सबसे ज्यादा लोगों की मौत होती है उसमें टीबी सबसे उपर है. यही वजह है कि भारत सरकार ने साल 2025 तक इसे उन्मूलित करने का बड़ा लक्ष्य लिया था. जिले जिले में इसकी जांच और इलाज के लिए व्यवस्थायें भी की गयी थीं लेकिन, कोरोना की वजह से टीबी का इलाज और इसके नये मरीजों की तलाश, दोनों पर ही फर्क पड़ा है. पूरे देश में पिछले साल के मुकाबले इस साल अभी तक तय लक्ष्य के सापेक्ष महज 40 फीसदी ही नये मरीज तलाशे जा सके हैं. यूपी में साल 2019 के मुकाबले इस साल एक लाख से ज्यादा ये संख्या गिरी है. यानी पिछले साल की तुलना में इस साल एक लाख कम नये मरीज तलाशे जा सके हैं.

ट्रेस करने में हो रही दिक्कत

जानकार इसे काफी खतरनाक मानते हैं. उनकी चिन्ता है कि अपने आप से न तो टीबी के मरीज सामने आ रहे हैं और ना ही सरकारी अमला उन्हें ट्रेस कर पा रहा है. राज्य टीबी अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने ये माना कि मरीज कम सामने आये हैं. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण भी ऐसा हुआ है. इसलके अलावा लोगों के जागरूक होने और लगातार मास्क पहनने से बीमारी के फैलने की दर भी कम हुई होगी. हालांकि इससे चिन्तित उन्होंने कहा कि मरीजों की गिरती संख्या को देखते हुए ही ये फैसला लिया गया है कि लंबी खासी और बुखार वाले लोग यदि कोरोना निगेटिव हैं तो हम उनकी टीबी की जांच करायेंगे. इसके अलावा अगले कुछ दिनों में टीबी मरीजों की तलाश के लिए स्पेशल अभियान भी चलाया जायेगा.

बता दें कि लॉकडाउन के फेज़ में ही न्यूज़ 18 ने इस खतरे की तरफ इशारा किया था. तब हमने बताया था कि कोरोना के कारण टीबी की जांच का प्रभावित होना खतरनाक हो सकता है. देर से ही सही लेकिन, अब स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने टीबी मरीजों की खोज और उनके प्रॉपर इलाज की ओर कदम बढ़ा लिया है.