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जयपुर: कानूनी दांवपेच में उलझा सियासी संकट, हाईकोर्ट आज फैसला सुनाएगा या नहीं! संशय बरकरार

जयपुर. राजस्थान में चल रहे सियासी उठापटक (Political crisis) के बीच अब सबकी नज़रें राजस्थान हाई कोर्ट (High Court) पर टिकी हैं. लेकिन क्या हाईकोर्ट शुक्रवार को नोटिस याचिका मामले में अपना फैसला सुनाएगा? इसको लेकर अभी संशय बना हुआ है. हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली के अनुसार, जिस मामले में फैसला सुनाना होता है वह कॉजलिस्ट में ‘जजमेंट प्रोनाउंसमेंट’ की हेडिंग से लिस्ट में होता है. लेकिन यह मामला मुख्य वाद सूची ‘रिप्लाई नॉट फाइल्ड’ हेडिंग से लिस्ट में है. मतलब साफ है कि जरूरी नहीं कि अदालत आज मामले में फैसला सुनाए. वहीं अगर आज कोर्ट फैसला सुना भी देती है तो वह फिलहाल लागू नहीं होगा.

विधानसभा स्पीकर के नोटिस के खिलाफ सचिन पायलट गुट की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में दायर याचिका पर तीन दिन लगातार मैराथन सुनवाई हुई थी. मुख्‍य न्‍यायाधीश इंद्रजीत माहंती और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खंडपीठ ने मंगलवार को सुनवाई पूरी कर ली थी और 24 जुलाई फैसले की तारीख तय की थी. लेकिन गुरुवार को जैसे ही कॉजलिस्ट आई तो उसमें मामला फैसले के लिए लिस्ट नहीं हुआ. ऐसे में अभी यह संशय बना हुआ है कि अदालत शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगी या नहीं.

पायलट गुट ने एक और प्रार्थना-पत्र दायर किया

इस मामले में दो दिन पहले बुधवार को सचिन पायलट गुट की ओर से एक प्रार्थना पत्र हाई कोर्ट में दायर किया गया था. उसमें अदालत से कहा गया है कि मामले में शेड्यूल 10 के 2-1-ए को चुनौती दी गई है. ऐसे में याचिका में केन्द्र सरकार को भी पार्टी बनाया जाये. पार्टी नहीं बनाने से याचिकाकर्ता के हित प्रभावित होंगे. ऐसे में हो सकता है कि अदालत शुक्रवार को इस प्रार्थना पत्र पर ही सुनवाई करें.

फैसला आ भी गया तो लागू नहीं होगा
अगर आज हाई कोर्ट अपना फैसला सुना भी देता है तो यह फैसला लागू नहीं होगा. क्योंकि मामले में हाई कोर्ट के हस्तक्षेप करने के खिलाफ स्पीकर सीपी जोशी की ओर से दायर एसएलपी पर गुरुवार को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट का जो भी फैसला आएगा वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अधीन रहेगा. मतलब हाई कोर्ट का फैसला आने के बाद भी लागू नहीं होगा. ऐसे में फैसले से कोई भी पक्ष सीधे तौर पर प्रभावित नहीं होगा. लेकिन फैसला किसके पक्ष में आता है और किसके खिलाफ यह साफ जरूर हो जाएगा. लेकिन फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि प्रदेश में चल रहा सियासी संकट कानूनी दांवपेचों में उलझ कर रह गया है. इसके जल्द सुलझने के भी कोई आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं.