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प्रतापगढ़- चलते चलते छूटा साथ,तो भर आयीं प्रमोद तिवारी की आंखें…

रविवार का दिन,सांगींपुर का राजमतीपुर गांव।
दोपहर की तपिस से ज्यादा कांग्रेंस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी का निर्मल हृदय किसी अपने बेहद करीबी की याद में शायद अजीब सी बेचैनी में धड़क सा रहा था।
राजमतीपुर में आज जब प्रमोद तिवारी अपनी विधायक बेटी आराधना मिश्रा मोना के साथ अपने अजीज खांटीं समर्थक भूपेन्द्र सिंह जी के आवास पर पहुँचे तो उनके चिर – परिचित तेज रफ्तार के कदम जानें क्यूं कभी किसी न भुला सकने वाली यादों के साये में भाई भूपेन्द्र की डेहरी लांघने में ठिठक से रहे थे ! कभी दूर से ही अपने नेता प्रमोद जी पर नजर पड़ते ही, जो भूपेन्द्र सिंह लपकर

पांव द्दूने को दौड़ पड़ते थे, आज वह एक चित्र बनकर ” नेता जी ” के सामने खामोश कैसे हो गये
अपने अजीज के कल्पना से परे खामोश चेहरे पर जैसे ही नजर पड़ी, मुश्किल से मुश्किल घड़ी में धैर्य जिनका नाम है, वह प्रमोद तिवारी अंदर से विचलित से हो गये। बढ़े हांथ श्रद्वांजलि के पुष्प की तरफ तो भर आयीं प्रमोद तिवारी की आँखें, अवरूद्व हो गया गला, तो निशब्द दिख रहीं थीं आराधना मिश्रा मोना।
प्रयागराज में बेहतर से बेहतर भूपेन्द्र जी के उपचार का जतन कर आश्वस्त प्रमोद तिवारी एकाएक जानें कैसे हांथ से सबकुछ निकल जाने पर स्तब्ध थे। दर असल रामपुर खास के विकास की आंधीं को कभी किसी विपरीत हवा ने जरा भी द्दूने की कोशिश की तो मिशन प्रमोद के अजेय चट्टान की एक मजबूत शिला बनकर नेता जी के पीछे प्रहरी बन जाया करते थे भाई भूपेन्द्र।
चंद निहित स्वार्थी छदम ओछी सियासत को भी आइना दिखाया करता था भूपेन्द्र सिंह का प्रमोद तिवारी के प्रति दिली समर्पण ।
भूपेन्द्र जी को नजदीक से जानने वाले बखूबी जानते हैं कि उनके तन, मन में सदैव प्रमोद जी पूज्य विप्र तो थे ही, विकास के देवता भी। तभी तो , बाग में बैठे जरूर प्रमोद तिवारी, पर उनके आज अपने एक निश्छल साथी, रक्त की प्रगाढ़ता से भी ऊपर उठकर भातृत्व धर्म निभाने वाले भाई के यूं अकस्मात खो देने की पीड़ा महसूस कर राजमतीपुर की हवायें तक खामोश हो गयीं थीं।
.. तभी तो मौजूद सैकड़ों निगाहें भीं ,स्तब्ध सी हो उठीं। ( मिशन रामपुर खास के एक एकनिष्ठ , समर्पित योद्वा की चिर स्मृतियों के प्रति श्रद्वानवत )

रिपोर्ट- डा.आर.आर.पाण्डेय