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उत्तराखंड: अब शासन को अनियमितता की रिपोर्ट भेजेगी,सिडकुल घोटाले में SIT ने 25 मामलों की जांच की पूरी

देहरादून. साल 2017 से लंबित चल रही सिडकुल घोटाले (Siducal Scam) की 300 से अधिक मामलों की जांच में अब तेजी आने लगी है. इसमें अभी तक 25 फाइलों की जांच पूरी हो गई है. सभी मामलों में अलग- अलग अनियमितता सामने आयी है, जिनकी रिपोर्ट एसआईटी (SIT) , शासन को भेजने जा रही है. साथ ही इन मामलों से जुड़े अधिकारियों को भी अपना पक्ष रखने के लिए एसआईटी एक मौका देकर इनसे भी पूछताछ करेगी. आईजी गढ़वाल (IG Garhwal) ने शनिवार को एसआईटी जांच से जुड़े 6 जनपदों के अधिकारियों के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मीटिंग ली. उन्होंने बताया कि जांच में सिडकुल के अधिकारियों के द्वारा घोर अनियमितता की गयी है जिसकी पूरी फाइल शासन को भेजी जा रही है. जांच में कई अधिकारियों के द्वारा भुगतान गलत तरीके से किया गया, जबकि कई जनपदों में नियम विरुद्ध निर्माण कार्य भी कराए गए है.

आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार (Abhinav Kumar) ने बताया कि शासन की अनुमति के बाद इन मामलों में मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा. राज्य में हुए घोटालों में सुमार सिडकुल घोटाला बड़ा घोटाला बताया जाता है, जिसमें साल 2012 से साल 2017 तक कई प्रकार के खेल विभाग द्वारा खेले गए थे. इन सभी मामलों को न्यूज़ 18 ने प्रमुखता से दिखाया था जिसका संज्ञान लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने साल 2012 से 17 में हुए कार्यों और भर्तियों पर आईजी गढ़वाल के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया था. जिस पर एसआईटी अब तेजी से काम कर रही है और मार्च तक सभी मामलों की जांच रिपोर्ट शासन को भेजने की बात कर रही है.

एसआईटी ने 6 बिंदुओं पर काम किया है
वहीं, अभी तक के ममलों में एसआईटी को बड़ी खामियां देखने को मिली हैं. इन 25 मामलों की जांच में एसआईटी ने 6 बिंदुओं पर काम किया है, जिसमें साफ किया है कि जो भी काम सिडकुल में हुए हैं वो समय बद्ध नहीं हुए हैं. सभी कार्य विलंब से शुरू किए गए और पेनल्टी जो सिडकुल को कार्यदाई संस्था पर लगाना था वो नहीं लगाया गया. कई कार्यों में तो अभी तक हैंडओवर टेक ओवर हुआ ही नहीं है. कामों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं. साथ ही कई कामों में तो रखरखाव ही नहीं रखा गया. काम किसी भी संस्था को दिया गया तो एमओयू के नियमों का भी पालन नहीं किया गया. साथ ही कुछ ऐसे भी काम सिडकुल में अधिकारियों द्वारा किये गए जिनके लिए वो अधिकारी एलिजिबल ही नहीं थे. आपको बता दें सिडकुल में जिन भी कामों की आज एसआईटी जांच कर रही है उनमें से अधिकतर काम यूपी निर्माण निगम के द्वारा किये गए हैं. सिडकुल का ये घोटाला करीब एक हजार करोड़ का बताया जाता है, जहां अधिकारियों ने निर्माण कार्य कराने के नाम पर खूब बंदरबांट कर मस्ती की.