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कौन है लादेन की भतीजी, जो अगला 9/11 रोकने के लिए ट्रंप को कर रही है सपोर्ट

आतंकी ओसामा बिन लादेन की भतीजी नूर बिन लादिन (Osama bin Laden’s niece Noor bin Ladin) ने अपने एक बयान से तहलका मचा दिया है. नूर का मानना है कि अमेरिका को अगले 9/11 से सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ही बचा सकते हैं. ये बयान अमेरिकी चुनाव से ठीक पहले दिया गया है और वोटरों पर काफी असर डाल सकता है. न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में ओसामा के बड़े भाई यसलाम बिन लादिन की बेटी नूर ने ऐसी कई बातें कहीं. जानिए, कौन है ये खूबसूरत महिला, जिसका आतंकी परिवार से संबंध है और वो ऐसा क्यों मानती हैं.

बता दें कि ओसामा बिन लादेन की अगुवाई वाले आतंकी संगठन अलकायदा के आतंकवादियों ने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में 4 हमलों को अंजाम दिया था. इन हमलों में 2,977 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 25 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे. आरोप को देखते हुए अमेरिकी सेना ने लादेन का खोज अभियान चलाया और साल 2011 में उसे पाकिस्तान में मार दिया गया. खुद सऊदी अरब ने भी अपने इस नागरिक का शव लेने से इनकार कर दिया था.

osama bin ladenअलकायदा के आतंकवादियों ने 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हमलों को अंजाम दिया था (Photo- ndla)

अब इसी आतंकी की भतीजी नूर सामने आई हैं. अपने चाचा के खराब कारनामों को देखते हुए उन्होंने अपना सरनेम लादेन से बदलकर लादिन कर लिया. 33 साल की नूर कहती हैं कि फिलहाल सिर्फ ट्रंप में ही आतंकी गतिविधियों को रोकने का दम है. वे यहां तक मानती हैं कि पूर्व राष्ट्रपति बराम ओबामा के दौर में आतंकी तेजी से फैले. बता दें कि तब जो बिडेन उप-राष्ट्रपति थे और अब वही ट्रंप के विरोध में उम्मीदवार हैं. नूर बिडेन की नीतियों और आतंकी खत्म करने की उनकी मजबूती पर सवाल उठाते हुए ट्रंप की तारीफ करती हैं.

अमेरिका को दिलोजान से चाहने का दावा करने वाली नूर ओसामा के सौतेले बड़े भाई यस्लाम बिन लादेन और स्विस लेखिका कार्मेन दुफोर की संतान हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक साल 1988 में उनके माता-पिता के तलाक के बाद नूर और उसकी दो बहनें अपनी मां के साथ स्विटजरलैंड में रहे. वहीं उनकी पढ़ाई-लिखाई हुई. नूर का कहना है कि उनके पिता अलगाव के बाद कभी उनसे या मां से मिलने नहीं आए और न ही कभी कोई संपर्क रहा.

donald trumpनूर आतंक को खत्म करने की बात कर रही हैं और इसी मुहिम के तहत वो ट्रंप की सपोर्टर हैं

नूर ने अपनी पढ़ाई यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा से की. वहां उन्होंने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री ली, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से लॉ में पीजी किया. कंप्यूटर में खासी दिलचस्पी रखने वाली इस युवती ने कंप्यूटर कोडिंग में भी हाथ आजमाए. फिलहाल नूर अपना पसंदीदा काम कर रही हैं, वो है किताब लेखन. लेखिका की बेटी को लिखने का शौक है और वे एक किताब पर काम कर रही हैं, जो कुछ इस तरह से है- 21वीं सदी के शुरुआती 20 साल. इससे अंदाजा होता है कि वे अपनी जिंदगी के बारे में कई राज खोलेंगी.

न्यूयॉर्क पोस्ट को अपने इंटरव्यू के दौरान नूर के कई बातें बताईं. मिसाल के तौर पर जब अमेरिका में 9/11 हमला हुआ था, तब वे केवल 14 साल की थीं. उन्हें अखबारों से इसका पता चला और वे एकदम घबरा गई थीं. इसकी वजह ये थी कि हमला अमेरिका पर हुआ था. वे कहती हैं कि मैं अपनी मां के सात तीन साल की उम्र से अमेरिका जाती रही थी. ऐसे में वही मेरा दूसरा घर था. मेरे दूसरे घर पर हमला हुआ था.

नूर बिन लादिन अमेरिका का अपना दूसरा घर कहती हैं (Photo-pixabay)

लादेन के आतंक के चलते नूर ने अपने परिवार-समेत अपना सरनेम लादिन करवा लिया. हालांकि ये अब भी काफी कुछ मिलता-जुलता ही है. इसके बाद भी अमेरिका में नूर को कभी कोई खराब अनुभव नहीं हुआ. वे न्यूयॉर्क में हमले की जगह, जिसे ग्राउंड जीरो कहते हैं, वहां जाना चाहती हैं लेकिन अब तक न तो मौका मिल सका और न ही हिम्मत जुट सकी. भविष्य में नूर वहां जरूर विजिट करना चाहेंगी.

इधर आयरिश टाइम्स की खबर एक बात राज खोलती है. उनकी मां कार्मेन ने अपनी एक किताब में लादेन परिवार के साथ रहे वक्त के बारे में बताया है. The Veiled Kingdom नाम की इस किताब में कई चौंकाने तो कई रोंगटे खड़े करने वाले अनुभव हैं. इस किताब के कुछ चैप्टर पढ़कर ही अंदाजा लग जाता है कि कोई मां अपने पति को छोड़कर क्यों अपनी बेटियों को अकेले पालने का फैसला कर पाती है.

इसी रिपोर्ट के मुताबिक कार्मेन और उनकी बेटियां ही इकलौता लादेन परिवार है, जिनका सरनेम वेस्टर्न संसार की टेलीफोन डायरेक्टरी में है. यानी लादेन से पूरी दुनिया इतनी नफरत करती है. अब नूर आतंक को खत्म करने की बात कर रही हैं. और इसी मुहिम के तहत वो ट्रंप की सपोर्टर बन गईं.