लखनऊ के विकासनगर में हालिया अग्निकांड के बाद पुनर्वास योजना की धीमी प्रगति चिंता का विषय बनकर सामने आई है। 15 अप्रैल को लगी भीषण आग में करीब 250 झुग्गियां जलकर राख हो गई थीं, जबकि हादसे में दो सगी बहनों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर ये झुग्गियां बसी थीं, वह लोक निर्माण विभाग (PWD) की है। सरकार ने वर्ष 2023 में यहां रहने वाले परिवारों के पुनर्वास के लिए फ्लैट निर्माण की योजना बनाई थी, जिसकी जिम्मेदारी राज्य नगरीय विकास अभिकरण (SUDA) को सौंपी गई थी।
योजना के तहत वर्ष 2024 में सर्वे कार्य पूरा किया गया और 2025 में आवश्यक दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई। इसके बावजूद अब तक जमीन PWD से SUDA को हस्तांतरित नहीं हो सकी है, जिसके चलते पूरी परियोजना अटकी हुई है।
इसके अलावा, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत फ्लैट निर्माण के लिए निजी बिल्डरों की ओर से भी कोई खास रुचि नहीं दिखाई गई है, जिससे योजना के क्रियान्वयन में और देरी हो रही है।
विकासनगर क्षेत्र का विकास मूल रूप से वर्ष 1970 में आवास विकास परिषद द्वारा किया गया था और आज यहां बड़ी संख्या में लोग निवास करते हैं। आग की इस घटना के बाद प्रभावित परिवारों के सामने पुनर्वास की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
हालांकि सरकार की योजना कागजों पर मौजूद है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसकी धीमी प्रगति से पीड़ित परिवारों की उम्मीदें अधर में लटकी हुई हैं, जो अब जल्द राहत और स्थायी आवास की मांग कर रहे हैं।
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