नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर से टेंशन कम होती हुई दिखाई दे रही है. इसका सबसे बड़ा सुबूत अमेरिका की ओर से दो हफ्ते के सीजफायर का ऐलान है. जिसके बाद इंटरनेशनल क्रूड ऑयल मार्केट में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. सबसे ज्यादा असर अमेरिकी कच्चे तेल पर देखने को मिल रहा है. जिसकी कीमतों में 19 फीसदी की बड़ी गिरावट देखने को मिली है और दाम 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए है. जबकि एक दिन पहले अमेरिकी क्रूड के दाम 116 डॉलर प्रति बैरल के पार चले थे. जानकारों की मानें तो कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया है कि ये सीजफायर इसी शर्त के साथ हुआ कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से ओपन करेगा. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें किस लेवल पर दिखाई दे रही हैं.
अमेरिकी क्रूड ऑयल हुआ क्रैश:
इंटरनेशनल मार्केट में अमेरिकी क्रूड ऑयल के दाम पूरी तरह से क्रैश हो गए हैं. जहां दाम 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए थे. वो 91 डॉलर प्रति बैरल पर देखने को मिल रहे हैं. इंटरनेशनल मीडिया रिपोर्ट के आंकड़ों के अनुसार डब्ल्यूटीआई क्रूड के दाम कारोबारी सत्र दौरान करीब 19 फीसदी की गिरावट के साथ 91.11 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए थे. जबकि एक दिन पहले मार्केट 112.41 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था. इसका मतलब है कि अमेरिकी तेल की कीमतों में 21.3 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट देखने को मिल चुकी है. अगर दिन के पीक से देखें तो कीमतों में 22.50 फीसदी यानी 26.46 डॉलर प्रति बैरल की गिरावट देखने को मिल चुकी है. अमेरिकी क्रूड ऑयल के दाम 117.57 डॉलर प्रति बैरल के साथ 52 हफ्तों के पीक पर पहुंच गए थे.
खाड़ी देशों के तेल में गिरावट:
वहीं दूसरी ओर खाड़ी देशों के तेल में भी बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. बुधवार को बाजार खुलते हुए खाड़ी देशों के तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए और करीब 15 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. आंकड़ों को देखें तो ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम कारोबारी सत्र के दौरान 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट के साथ 92.82 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं. इसका मतलब है कि खाड़ी देशों का कच्चा तेल मंगलवार के मुकाबले में करीब 18 डॉलर प्रति बैरल तक टूट चुका है. एक दिन पहले ब्रेंट क्रूड के दाम 109 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा थे. जोकि कारोबारी सत्र के दौरान 112 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गए थे.
सीजफायर का ऐलान:
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ऐलान कर दिया है कि अगर ईरान तत्काल प्रभाव से होर्मुज स्ट्रेट को खोल देता है तो, अमेरिका दो हफ्ते तक कोई हमला नहीं करेगा. इससे पहले मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर ही कहा था कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी. बुधवार को विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची के एक बयान के अनुसार, ईरान ने कहा कि अगर उस पर होने वाले हमले बंद हो जाते हैं तो वह भी अपने हमले रोक देगा. साथ ही, ईरानी सशस्त्र बलों के समन्वय से Strait of Hormuz के रास्ते दो हफ्ते तक सुरक्षित आवाजाही संभव हो पाएगी. ईरान के साथ US और इजराइल के बीच चल रहे तनाव के कारण मार्च में तेल की कीमतों में इतिहास की सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी देखने को मिली—जो 50% से भी ज़्यादा थी.
मिला 10-सूत्रीय प्रस्ताव:
ट्रंप ने कहा कि US को ईरान की तरफ से 10-सूत्रीय प्रस्ताव मिला है. उन्होंने इस प्रस्ताव को बातचीत के लिए एक ‘कामयाब आधार’ बताया और कहा कि दोनों पक्ष लंबे समय तक चलने वाली शांति के लिए एक पक्के समझौते तक पहुंचने के काफी करीब हैं. IG के विश्लेषक टोनी साइकामोर ने एक नोट में लिखा कि यह एक अच्छी शुरुआत है और इससे Strait of Hormuz को स्थायी रूप से फिर से खोलने का रास्ता खुल सकता है—लेकिन अभी भी कई ‘अगर-मगर’ (शर्तें) हैं जिन्हें सुलझाना बाकी है.
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