पंजाब के कपूरथला से साल 2001 में लापता हुए हंसा सिंह आखिरकार करीब 25 साल बाद अपने परिवार से मिल गए। इस दौरान उनका जीवन भटकाव और संघर्ष में बीता, जबकि परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था।
परिजनों के अनुसार, हंसा सिंह के लापता होने के बाद करीब तीन साल तक उनकी तलाश की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर उन्हें मृत मान लिया गया। बाद में परिवार ने सामाजिक परंपराओं के तहत उनकी पत्नी की शादी उनके छोटे भाई (देवर) से कर दी। इस विवाह से दो बच्चे भी हैं।
इधर, हंसा सिंह भटकते हुए उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में पहुंच गए, जहां नहटौर कस्बे में वे वर्षों तक एक भिखारी के रूप में जीवन यापन करते रहे। स्थानीय लोग उन्हें भोजन आदि देकर मदद करते थे।
हाल ही में कुछ लोगों को उन पर संदेह हुआ और उन्होंने पूछताछ के बाद इसकी सूचना पुलिस को दी। इसके बाद बिजनौर पुलिस ने पंजाब के कपूरथला पुलिस से संपर्क किया, जिससे उनकी पहचान स्थापित हो सकी और परिवार का पता लगाया गया।
लंबे समय बाद जब हंसा सिंह अपने घर लौटे तो परिवार के लिए यह भावुक पल था। हालांकि अब उनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक हो चुकी है और पारिवारिक परिस्थितियां भी पूरी तरह बदल चुकी हैं।
यह घटना जहां एक ओर मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है, वहीं दूसरी ओर यह भी दिखाती है कि समय के साथ जिंदगी किस तरह अप्रत्याशित मोड़ ले सकती है।
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