Washington: अमेरिका में FBI चीफ काश पटेल को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है और अब उन्हें पद से हटाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक व्हाइट हाउस के अंदर उनके कामकाज और व्यवहार को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि यह सिर्फ समय की बात हो सकती है जब उन्हें पद छोड़ना पड़े। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारी काश पटेल से जुड़े लगातार विवादों और नकारात्मक खबरों से परेशान हैं। उनका मानना है कि इससे सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है। हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की गई है।
काश पटेल पर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि वे अत्यधिक शराब पीते हैं और दफ्तर में सहकर्मियों को असहज महसूस कराते हैं। यह भी आरोप है कि वे कई अहम बैठकों में मौजूद नहीं रहते। एक हालिया घटना में उनका कंप्यूटर सिस्टम लॉक हो गया था, जिससे वे घबरा गए और उन्हें लगा कि शायद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। इन आरोपों के अलावा उनके पुराने विवाद भी फिर से चर्चा में हैं। 2018 में उन्होंने एक ऐसा मेमो तैयार किया था, जिसमें FBI पर राजनीतिक पक्षपात के आरोप लगे थे। 2019 में यूक्रेन मामले में उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके अलावा पेंटागन में रहते हुए नेशनल गार्ड की तैनाती में देरी को लेकर भी उन पर आरोप लगाए गए थे।
काश पटेल पर लगे 10 बड़े आरोप
अत्यधिक शराब सेवनःआरोप है कि वे जरूरत से ज्यादा शराब पीते हैं, जिससे उनकी प्रोफेशनल इमेज प्रभावित हुई।
ऑफिस में असहज माहौलः सहकर्मियों को उनके व्यवहार से असहज महसूस होने की शिकायतें सामने आईं।
महत्वपूर्ण बैठकों से गायब रहनाः कई बार अहम मीटिंग्स में उनकी अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठे।
कंप्यूटर घटना से घबराहटः सिस्टम लॉक होने पर उन्हें लगा कि डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया है, जिसे उनकी असुरक्षा से जोड़ा गया।
2018 का विवादित मेमोः FBI पर ट्रंप के खिलाफ जासूसी का आरोप लगाने वाला मेमो लिखा, जिसे पक्षपाती कहा गया।
यूक्रेन मामले में गुप्त भूमिकाः 2019 में आरोप लगे कि उन्होंने आधिकारिक चैनलों को दरकिनार कर काम किया।
CIA नियुक्ति विवादः ट्रंप उन्हें CIA में ऊंचा पद देना चाहते थे, लेकिन अंदरूनी विरोध के कारण यह रुक गया।
नेशनल गार्ड तैनाती में देरीः पेंटागन में रहते हुए कैपिटल हिंसा के दौरान कार्रवाई में देरी का आरोप लगा।
गोपनीय दस्तावेजों पर बयानः मार-ए-लागो छापे के बाद उन्होंने दावा किया कि दस्तावेज पहले ही डीक्लासिफाई थे, जिस पर सवाल उठे।
राजनीतिक बयानबाजी और धमकीः उन्होंने खुलेआम ट्रंप के विरोधियों और पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही, जिससे विवाद बढ़ा।
मीडिया रिपोर्ट्स के बाद काश पटेल ने The Atlantic के खिलाफ 250 मिलियन डॉलर का मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है। उनका कहना है कि उनके खिलाफ झूठी और भ्रामक खबरें चलाई जा रही हैं। वहीं, मैगजीन ने अपने दावों पर कायम रहते हुए कहा है कि उनकी रिपोर्टिंग तथ्यों पर आधारित है। लगातार बढ़ते विवाद और अंदरूनी नाराजगी के कारण काश पटेल की स्थिति कमजोर मानी जा रही है। अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में उन्हें पद से हटाया जा सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला प्रशासन के उच्च स्तर पर ही लिया जाएगा।
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