Avimukteshwarananda Taunt On CM Yogi: गोरक्षा पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बड़ा राजनीतिक संकेत दिया है। साथ ही उन्होंने सीएम योगी आदित्याथ पर निशाना भी साधा है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ में गोरक्षा के मुद्दे पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर आगामी चुनाव में कोई भी राजनीतिक दल गोरक्षा को लेकर ठोस संकल्प नहीं लेता, तो गोरक्षक पूरे प्रदेश में निर्दलीय प्रत्याशी उतारेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है।
गोमाता पर राजनीति नहीं, ठोस कदम उठाने की मांग
गंगानगर स्थित डिफेंस कॉलोनी में कारोबारी सुदीप अग्रवाल के आवास पर आयोजित प्रेसवार्ता में शंकराचार्य ने गोमाता के नाम पर राजनीति किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गोरक्षा के नाम पर सिर्फ बयानबाजी हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रभावी काम नजर नहीं आता। उन्होंने सरकार से मांग की कि गाय को पशु सूची से हटाकर ‘मां’ का दर्जा दिया जाए। उनका कहना था कि इस विषय पर सरकारें गंभीरता से सुनने को तैयार नहीं हैं।
शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना का आह्वान
शंकराचार्य ने बताया कि गोरक्षा के लिए उन्होंने पहले ही ‘शंकराचार्य चतुरंगिणी सेना’ के गठन का आह्वान किया है। इस सेना में जनबल, धनबल, मनबल और तनबल को शामिल किया गया है। उन्होंने बताया कि पुरुष, महिला और तृतीय लिंग को इसमें सर्वाध्यक्ष के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जिससे यह अभियान व्यापक सामाजिक भागीदारी के साथ आगे बढ़ सके।
3 मई से गोरखपुर से शुरू होगी गोरक्षा यात्रा
गोरक्षा के समर्थन में 3 मई से गोरखपुर से एक बड़ी यात्रा शुरू की जाएगी, जो 23 जुलाई को लखनऊ के काशीराम पार्क में समाप्त होगी। इस यात्रा में एक लाख 18 हजार 700 लोगों की भागीदारी प्रस्तावित है। यात्रा का उद्देश्य गोरक्षा के प्रति जनजागरूकता फैलाना और समाज को इस मुद्दे पर संगठित करना होगा।
उत्तर प्रदेश में घटी गायों की संख्या का किया जिक्र
शंकराचार्य ने बीसवीं पशु गणना का हवाला देते हुए दावा किया कि पश्चिम बंगाल में गायों की संख्या 15 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि उत्तर प्रदेश में 4.8 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि गोमाता के नाम पर केवल ध्रुवीकरण की राजनीति की जाती है, जबकि संरक्षण के लिए ठोस नीति दिखाई नहीं देती।
धार्मिक प्रतीकों पर रोक के मुद्दे पर भी जताई चिंता
प्रेसवार्ता में उन्होंने हाल में बिहार में पुलिसकर्मियों को तिलक और बिंदी लगाने पर रोक संबंधी बयान पर चिंता जताई। साथ ही कर्नाटक में परीक्षा के दौरान छात्रों से जनेऊ उतरवाने की घटना का उल्लेख करते हुए इसे धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप बताया। उन्होंने कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों से छेड़छाड़ को लेकर समाज में चिंता बढ़ रही है।
चुनावी राजनीति और बयानों पर उठाए सवाल
शंकराचार्य ने कहा कि चुनाव से पहले फिल्मों और बयानों के जरिए माहौल बनाया जाता है और फिर वोट मांगे जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह सिलसिला वर्षों से चल रहा है, लेकिन अब लोगों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा है। उनका कहना था कि केवल बयान देने से गोरक्षा नहीं होगी, बल्कि ठोस नीतियां और कार्रवाई जरूरी हैं।
योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर भी टिप्पणी
पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाय को लेकर दिए गए बयानों का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि वे बातें सिर्फ बयान तक सीमित रहीं। उन्होंने योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा कि CM योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली निम्नस्तरीय है।
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