कम्बल वाले बाबा के ‘इलाज’ का खेल बेनकाब, अंधविश्वास के नाम पर ठगी का आरोप
* मामला कन्नौज जिले के मानीमऊ गांव का है।
* तेल-चूर्ण और यंत्र के नाम पर वसूली।
चूर्ण एक डिब्बा 650 रु का इस्तेमाल करने पर कभी कोई रोग न होगा।
* यंत्र घर ले जाओ 6 महीने में बीस लाख आयेंगे।
* तेल एक शीशी 650 रु लगाने से किसी प्रकार कोई दर्द कभी जीवन में न होगा।
रिपोर्ट – अवनीश चंद्र तिवारी
कन्नौज
कन्नौज जिले के सदर कोतवाली क्षेत्र के मानीमऊ गांव में चल रहे तथाकथित ‘कम्बल वाले बाबा’ के कार्यक्रम और उनके इलाज के दावों पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पहले जहां मरीजों ने इलाज के नाम पर ठगी और बेअसर उपचार के आरोप लगाए थे, वहीं अब व्यवस्थाओं और व्यवहार को लेकर भी नई शिकायतें सामने आई हैं।
बताते चले कि स्थानीय लोगों के अनुसार, कार्यक्रम स्थल तक जाने वाले रास्तों पर बैरियर लगा दिए गए हैं, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि बाबा के चेले रास्तों पर बैठकर लोगों से अभद्र व्यवहार करते हैं और आम जनता से ठीक ढंग से बात नहीं करते बताया जा रहा है कि जहां कुछ ‘वीवीआईपी’ लोग सीधे पंडाल तक पहुंच जाते हैं, वहीं आम लोगों को अपने वाहन दूर खड़े कर पैदल ही जाना पड़ता है। इससे लोगों में नाराजगी है।

नाम न छापने की शर्त पर कई ग्रामीणों और इलाज कराने आए लोगों ने बताया कि खुलकर विरोध करने पर उनके साथ गलत व्यवहार किए जाने का डर बना रहता है कुछ ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि बाबा के पास निजी सुरक्षा गार्ड तैनात हैं, जो जानकारी लेने आए लोगों से भी बदसलूकी करते हैं।
कई महिलाओं ने बताया कि वे इलाज के लिए आई थीं, लेकिन सही जानकारी न मिलने पर दोबारा मिलने की कोशिश करने पर गार्डों ने उनके साथ ठीक व्यवहार नहीं किया।
इससे पहले भी मरीजों ने आरोप लगाया था कि उन्हें 4-5 दिन तक रुकवाकर महंगे दामों पर तेल,चूर्ण और यंत्र खरीदवाया जाता है, लेकिन कोई लाभ नहीं मिलता।
बताया गया कि दवा के साथ एक ‘निशान’ दिया जाता है, जिसके सामने ही दवा का उपयोग करने को कहा जाता है। इलाज के नाम पर शरीर को मरोड़ने जैसी प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं ।
मामले में स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेने पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सी.पी. पाल और चिकित्साधिकारी डॉ. स्वदेश गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि इस तरह के तरीकों से गंभीर या असाध्य रोगों का इलाज संभव नहीं है। उनका कहना था कि जब मेडिकल साइंस स्वयं कई जटिल बीमारियों के इलाज को चुनौती मानता है, तो इस प्रकार के दावे भ्रामक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी मुख्य चिकित्साधिकारी ने यह भी बताया कि जिलाधिकारी कार्यालय से भागवत कथा के आयोजन हेतु स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध आया था, जिसके तहत चिकित्सा व्यवस्था दी गई थी।

आरोप है कि धार्मिक आयोजन की आड़ में कथित इलाज कर भोली-भाली जनता को अंधविश्वास में फंसाया जा रहा है मौके पर बेचे जा रहे तेल और चूर्ण पर ‘काले कम्बल वाले बाबा’ का नाम और फोटो अंकित होने की बात भी सामने आई है, जिससे पूरे मामले के व्यावसायिक पहलू पर सवाल उठ रहे हैं यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आधुनिक चिकित्सा युग में भी अंधविश्वास और झोलाछाप इलाज किस तरह लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। प्रशासन से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।
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