Gold Price Crash: वैश्विक आर्थिक माहौल और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी के बाद सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। पिछले कुछ महीनों में सोने ने ऐतिहासिक ऊंचाइयों को छू लिया था, लेकिन अब विशेषज्ञ संभावित तेज गिरावट की चेतावनी दे रहे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात में स्थिरता और प्रमुख देशों की खरीदारी में कमी से सोने के दाम में बड़ी गिरावट आ सकती है।
रिकॉर्ड स्तर और तेजी का कारण (Gold Price Crash)
29 जनवरी को सोना अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके पीछे वैश्विक अस्थिरता, ब्रिक्स देशों और अन्य केंद्रीय बैंकों की बढ़ी हुई खरीदारी मुख्य कारण रही। हालांकि, अगले ही दिन कीमतों में तेजी के साथ गिरावट भी देखने को मिली, और तब से सोने का बाजार उतार-चढ़ाव भरा बना हुआ है।
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गिरावट की संभावित वजहें
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की बदलती रणनीति सोने की कीमतों पर असर डाल सकती है। रूस, जिसने डॉलर से दूरी बनाते हुए सोने की खरीद बढ़ाई थी, अब अमेरिकी डॉलर की ओर लौट सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो रूस अपने भंडार का कुछ हिस्सा बेच सकता है, जिससे वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों पर दबाव बनेगा। इसके अलावा, अमेरिका और रूस के बीच व्यापारिक समझौते और रूस-यूक्रेन युद्ध में नरमी आने से भी सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के रूप में सोने की मांग घट सकती है।
ब्रिक्स देशों की भूमिका
बीते छह महीनों में वैश्विक सोने की खरीद में BRICS देशों – चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका – की हिस्सेदारी लगभग 50% रही है। यदि ये देश डॉलर की ओर झुकाव बढ़ाते हैं और सोने की खरीद घटाते हैं, तो वैश्विक कीमतों में गिरावट तेज हो सकती है।
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रिसर्च रिपोर्ट का अनुमान
आर्थिक शोध संस्था Bloomberg की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ने की स्थिति में भारत में सोने की कीमतें ₹70,000 से ₹80,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ सकती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट अचानक नहीं आएगी, बल्कि चरणबद्ध रूप से होगी और 2027 के अंत तक कीमतें स्थिर हो सकती हैं।
निवेशकों के लिए संदेश
कुल मिलाकर, सोने के बाजार में हालिया तेजी के बाद अब सभी की नजर रूस की रणनीति, अमेरिका-रूस संबंध और ब्रिक्स देशों की खरीद नीति पर टिकी है। इन मोर्चों पर बदलाव आने पर सोने की चमक कुछ समय के लिए फीकी पड़ सकती है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहना जरूरी है।
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