नेशनल डेस्क: समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठवीं की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर छिड़े विवाद के संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर शुक्रवार को निशाना साधा और आश्चर्य जताया कि ”भाजपाई सरकार चला रहे हैं या मनमानी का सर्कस?” उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा बड़े-बड़े आरोप लगाती है और बाद में पकड़े जाने पर खेद व्यक्त करती है। उनकी यह टिप्पणी उच्चतम न्यायालय ने द्वारा एनसीईआरटी की पुस्तक के भविष्य में किसी भी प्रकाशन, पुनर्मुद्रण या डिजिटल प्रसार पर ”पूर्ण प्रतिबंध” लगाए जाने के एक दिन बाद आई है।

शीर्ष अदालत ने उल्लेख किया कि ऐसा लगता है कि न्यायपालिका को कमजोर करने और उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए एक ”गहरी साजिश” और ”सुनियोजित प्रयास” किया गया है। यादव ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ”जैसे फंसाती है चोर को खांसी, वैसे गुनाहगार को झूठी माफी।” उन्होंने कहा, ”भाजपाई अपनी भ्रष्टाचारी सोच से पहले तो दूसरों पर अपने से कई गुने बड़े आरोप लगाते हैं (जिसका मूल उद्देश्य ये होता है कि दूसरों के महाकाय आरोपों के आगे उनके भ्रष्टाचार नगण्य लगें) लेकिन जब फंस जाते हैं तो ‘खेद’ प्रकट करते हैं।”
सपा अध्यक्ष ने कहा, ”दिखावटी माफी आखिरकार पकड़ी ही जाती है, ऐसे धूर्त लोगों की झूठी मंशा और कपट का एक न एक दिन पर्दाफाश होता ही है, जो इस बात का भंडाफोड़ कर देता है कि वो कसूरवार हैं, बेकसूर नहीं।” उन्होंने कहा, ”ताजा मामले में एनसीईआरटी की किताब में इन भ्रष्ट भाजपाइयों ने माननीय न्यायापालिका तक पर भ्रष्ट होने के इल्जाम लगाए और जब उच्चतम न्यायालय से कड़ी आपत्ति हुई तो मासूम बनकर कह रहे हैं, हमें तो मालूम ही नहीं ये किसने किया।” यादव ने कहा, ”जनता पूछ रही है कि भाजपाई सरकार चला रहे हैं या मनमानी का सर्कस?”
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