वाराणसी: देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी में महाशिवरात्रि पर्व पारंपरिक उल्लास और धार्मिक आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ दूल्हे के रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर परंपरा के अनुसार, महाशिवरात्रि पर बाबा का विशेष श्रृंगार रुद्राक्ष, फल, मेवा और पुष्पों से निर्मित पारंपरिक सेहरे से किया जाएगा। रुद्राक्ष शिवत्व और वैराग्य का प्रतीक माना जाता है, जबकि फल एवं मेवा मंगलभाव और समृद्धि के सूचक हैं।
महाशिवरात्रि पर काशी में शिव बारात का विशेष महत्व
मंदिर से जुड़े वाचस्पति तिवारी ने बताया कि सेहरा पूर्णत: प्राकृतिक एवं धार्मिक सामग्री से तैयार किया जा रहा है। इसमें रुद्राक्ष के साथ मखाना, लौंग, इलायची, शिवलिंगी, अंगूर तथा विभिन्न सुगंधित पुष्पों का उपयोग किया जाएगा। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास से प्रारंभ होने वाली शिव बारात और श्री काशी विश्वनाथ धाम में रात्रि भर होने वाली चारों पहर की आरतियों के दौरान बाबा को यह सेहरा अर्पित किया जाएगा। बाबा की चल प्रतिमा पर भी यह विशेष श्रृंगार विराजमान रहेगा। महाशिवरात्रि पर काशी में शिव बारात का विशेष महत्व है।
मंदिर में विशेष पूजन, अभिषेक और आरती
लोक परंपरा के अनुसार, भगवान शिव दूल्हा बनकर माता गौरा के विवाह हेतु प्रस्थान करते हैं। इसी परंपरा के निर्वहन में बाबा विश्वनाथ का दूल्हा स्वरूप श्रृंगार किया जाता है। तिवारी ने बताया कि महाशिवरात्रि की रात्रि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में चारों पहर की सप्तर्षि आरती संपन्न होगी। इसका संचालन महंत परिवार के वरिष्ठ सदस्य एवं सप्तर्षि आरती के प्रधान पंडित शशिभूषण त्रिपाठी ‘गुड्डु महाराज’ के नेतृत्व में किया जाएगा। महाशिवरात्रि की रात्रि में मंदिर में विशेष पूजन, अभिषेक और आरती का क्रम चलता है तथा श्रद्धालु पूरी रात दर्शन और जलाभिषेक के लिए उपस्थित रहते हैं।
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