नेशनल डेस्क: Central Bureau of Investigation (CBI) की विशेष अदालत ने उत्तराखंड के एक पुराने भ्रष्टाचार मामले में अहम फैसला सुनाया है। करीब ₹55 लाख के PWD घोटाले में 8 सरकारी कर्मचारियों को दोषी ठहराते हुए अदालत ने सभी को 2-2 साल की सश्रम कारावास और कुल ₹2.85 लाख जुर्माना देने का आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला?
यह घोटाला साल 2001-2002 का है, जब हरिद्वार के लोक निर्माण विभाग में तैनात कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों पर सरकारी धन की हेराफेरी का आरोप लगा था। जांच में सामने आया कि फर्जी और अनधिकृत चेक जारी किए गए। सरकारी खजाने से करीब ₹55 लाख निकाले गए। पूरा मामला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया। इस केस की जांच Uttarakhand High Court के निर्देश पर 9 अगस्त 2003 को CBI को सौंपी गई थी।
किन लोगों को हुई सजा?
अदालत ने जिन 8 लोगों को दोषी माना, उनमें PWD हरिद्वार और रुड़की के कर्मचारी और एक ट्रेजरी अधिकारी सभी को 2 साल की सजा सुनाई गई है।
जांच और सुनवाई में क्या हुआ?
2005 में CBI ने 20 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें 12 सरकारी और 8 निजी लोग शामिल थे। सुनवाई के दौरान 4 आरोपियों की मौत हो गई। 7 आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और पहले ही सजा पा चुके। एक आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी किया गया।
लंबी जांच के बाद आया फैसला
करीब दो दशक पुराने इस मामले में अब जाकर अंतिम फैसला आया है, जो यह दिखाता है कि भ्रष्टाचार के मामलों में देर भले हो, लेकिन कार्रवाई जरूर होती है।
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