अनुदानित यूरिया से बन रहा था डीईएफ, कृषि विभाग की छापेमारी में खुलासा
बंद प्लांट में मिला अवैध स्टॉक, मुख्य आरोपी फरार
उर्वरक नियंत्रण आदेश का उल्लंघन, आरोपी पर होगी सख्त कार्रवाई
गोंडा- जनपद के विकास खण्ड छपिया के ग्राम सकदरपुर में अवैध रूप से डीईएफ (डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड) यूरिया निर्माण का मामला सामने आया है। सूचना पर जिला कृषि अधिकारी एवं अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) सी.पी. सिंह ने अपनी टीम के साथ मौके पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में संदिग्ध सामग्री बरामद की।
जांच के दौरान प्लांट बंद मिला, लेकिन परिसर के बाहर खुले स्थान पर चार सफेद कंटेनर और एक बड़ी काली पानी की टंकी पाई गई। इन कंटेनरों में पानी जैसे तरल पदार्थ भरा था, जिससे यूरिया जैसी तेज गंध आ रही थी। मौके पर मौजूद दो युवकों—दुर्गेश और विजय—से पूछताछ की गई, जिन्होंने बताया कि वे जनरेटर मरम्मत का कार्य करने आए थे और यह जनरेटर राकेश पाण्डेय द्वारा किराये पर लिया गया था।
टीम ने आगे की कार्रवाई करते हुए पुलिस चौकी बभनान के चौकी इंचार्ज उपनिरीक्षक घनश्याम वर्मा तथा ग्राम प्रधान को मौके पर बुलाया। उनकी उपस्थिति में बंद कमरे का ताला तोड़कर जांच की गई, जहां 36 खाली यूरिया की बोरियां (एचयूआरएल कंपनी) और लगभग आधा किलो यूरिया बिखरा हुआ मिला। साथ ही छोटे कंटेनरों में यूरिया घोल भी बरामद हुआ। एक कमरे में प्लांट स्थापित पाया गया और एक मोटरसाइकिल (नंबर यूपी-51 वी-1355) भी मौके से मिली।
बरामद सभी सामग्री को सील कर मकान मालिक एवं ग्राम प्रधान रमेश मिश्र को सुपुर्द कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डीईएफ निर्माण में तकनीकी ग्रेड यूरिया के स्थान पर अनुदानित यूरिया का अवैध उपयोग किया जा रहा था, जो उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7 का उल्लंघन है।
मुख्य आरोपी राकेश पाण्डेय से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला। कृषि विभाग ने उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि इस प्रकार की अवैध गतिविधियों पर सख्ती से अंकुश लगाया जाएगा।
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