लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया और कहा कि इस आशीर्वाद से ”नकली संतों का अंत होने जा रहा है।”
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यादव ने कहा कि वह शंकराचार्य से आशीर्वाद और ज्ञान लेने तथा उनसे कुछ सीखने आए थे। इस सवाल पर कि क्या शंकराचार्य से वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी कोई आशीर्वाद मिला है, सपा प्रमुख ने कहा, ”हम राजनीतिक लोग हैं। आज के समय पर जहां सोशल मीडिया इतना हावी है, हर व्यक्ति कोई ना कोई राजनीतिक अटकल जताने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन पूजनीय शंकराचार्य से मैं आशीर्वाद लेने आया था।”
यादव ने कहा कि कोई भी शुभ काम शुरू होने से पहले अगर साधु संतों का आशीर्वाद मिल जाए तो उससे अच्छा और क्या हो सकता है। हालांकि उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा, ”सबसे बड़ी बात है कि शंकराचार्य जी का आशीर्वाद मिलने से नकली संतों का अंत होने जा रहा है।” ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती गौ रक्षा अभियान के तहत बुधवार को लखनऊ पहुंचे थे।
सपा प्रमुख ने आगामी विधानसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों के टिकट कटने की खबर होने का दावा करते हुए कहा, ”सुनने में आ रहा है कि जिले-जिले में बैठकें होने लगी हैं कि किसका टिकट कटेगा और किसका बचेगा। बैठकें हो रही हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि दोनों उपमुख्यमंत्री को बाहर निकालिए और हो सकता है कि जनता के बीच में ये जाएं तो जीतें ही ना।” इस सवाल पर कि आने वाले समय में बैठकों में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के साथ-साथ भाजपा के जिला अध्यक्ष भी शामिल होंगे, सपा प्रमुख ने कहा, ”यह लोकतंत्र का सत्यानाश करने वाले लोग हैं। जिलाधिकारी महोदय यह सोचें कि उनके ऊपर भाजपा का जिलाध्यक्ष बैठेगा। इसका मतलब यह हुआ कि जिलाधिकारी को अपनी नेम प्लेट हटानी पड़ेगी।
यादव ने रसोई गैस सिलेंडर को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में कथित किल्लत के लिए केंद्र सरकार के फैसलों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली गोरखपुर और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में भी लोगों को रसोई गैस सिलेंडर पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने भारत के बुलावे पर संयुक्त अभ्यास में शामिल होने आए ईरान के युद्धपोत को अमेरिका द्वारा हमला करके डुबोए जाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वह जहाज भारत के बुलावे पर आया था इसलिए उस पर सवार लोग हमारे मेहमान थे।
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