वाराणसी में अपने ही बने है अपनो के कातिल
आर्थिक तंगी, अवैध सबन्ध और संपत्ति के लालच में लोग कर रहे है खून के रिश्तों का कत्ल
वाराणसी जिसे ज्ञान और आध्यात्म की नगरी कहा जाता है, आजकल खौफनाक खबरों से दहली हुई है। यहां खून के रिश्ते खून से ही रंगने लगे हैं। आर्थिक तंगी, अवैध संबंधों का शक और संपत्ति के लालच ने परिवारों को कत्लखाने में तब्दील कर दिया है।
पिछले पांच सालों में पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 50 से ज्यादा ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बेटे, भाई, बहू या दामाद ने अपने ही अपनों का खून बहाया। ये सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों की दास्तान हैं।
ताजा मामला फूलपुर थाना क्षेत्र के कठिरांव बाजार का है। यहां नाबालिग बहू ने मात्र 500 रुपये के विवाद में सास आशा देवी को कुल्हाड़ी से ताबड़तोड़ वार कर मौत के घाट उतार दिया। शादी का गिरवी लॉकेट छुड़ाने के लिए पैसे कम पड़ गए, तो गुस्सा इतना भड़का कि बहू ने घर लौटते ही सास पर हमला बोल दिया। पुलिस ने 24 घंटे के अंदर आरोपी को दबोच लिया और हत्या में इस्तेमाल कुल्हाड़ी बरामद कर ली। जांच में पता चला कि परिवार में आर्थिक तंगी पहले से ही चरम पर थी।इसी तरह बड़ागांव थाना क्षेत्र में दामाद ने ससुर की गला दबाकर हत्या कर दी। वजह? जमीन के बंटवारे के पैसे को लेकर पुराना विवाद। बच्चे सामने खड़े थे, मगर कातिल रुका नहीं। बेटे ने पुलिस को बताया, “मेरे नाना को पापा ने मार डाला।” यह घटना बताती है कि संपत्ति का लालच कितना खतरनाक हो सकता है।
अभी कल ही मंडुवाड़ीह थाना क्षेत्र में नशे की लत ने एक बेटे को अपनी मां का कातिल बना दिया। पैसे मांगने पर मना करने पर उसने मां का सिर कुचल दिया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी घनश्याम नशे में धुत था और घर में रोज-रोज झगड़े होते थे। आर्थिक तंगी ने परिवार को इतना तोड़ दिया कि रिश्ते खून के प्यासे हो गये है
पिछले सालों में भी ऐसे कई सनसनीखेज मामले आए। एक पति ने पत्नी और तीन बच्चों की हत्या के बाद खुदकुशी कर ली। वजह? पारिवारिक कलह और संदिग्ध अवैध संबंध। वहीं भेलूपुर के शिवाला इलाके में भतीजे ने 28 साल पुरानी दुश्मनी में चाचा-चाची समेत पांच लोगों का कत्ल किया और भिखारी-साधु के भेष में छिपता रहा। पुलिस ने 1047 सीसीटीवी फुटेज खंगालकर आरोपी को पकड़ा
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में तीन वजहें प्रमुख हैं—आर्थिक संकट, संपत्ति विवाद और अवैध संबंधों का शक। शहर के बाहरी इलाकों में गरीबी और बेरोजगारी बढ़ रही है। छोटी-छोटी बातों पर झगड़े खूनखराबे में बदल जाते हैं। अवैध संबंधों का शक परिवारों में जहर घोल रहा है, जबकि संपत्ति का लालच पीढ़ियों के रिश्तों को तोड़ रहा है।
काउंसलिंग सेशन और सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाए जाने की जरूरत है, स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
समाजशास्त्रियों का मानना है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़, नशे की लत और पारिवारिक मूल्यों का ह्रास इसकी जड़ है।
काशी की गलियों में अब सिर्फ घंटियां नहीं गूंजतीं, बल्कि अपनों के कत्ल की खौफनाक कहानियां भी गूंजती है। सवाल यह है कि कब तक रिश्तों पर खून के ये दाग लगते रहेंगे ?
OneIndia24live Hindi News Channel Today Breaking News Hindi Samachar