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गंगा एक्सप्रेसवे पर अदाणी समूह का महत्वपूर्ण कदम, 464 किलोमीटर सड़क तैयार…


उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे के तौर पर गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल को होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य के बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं। इसी क्रम में, यूपी में गंगा एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के बाद अब एक और बड़ा एक्सप्रेसवे तैयार हो रहा है। यह नया एक्सप्रेसवे गोरखपुर से शामली तक जाएगा, और 22 जिलों को जोड़ते हुए बिहार और नेपाल बॉर्डर तक पहुंचेगा। यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि दिल्ली एनसीआर और चार अन्य राज्यों के लिए भी बड़ी अहमियत रखती है।

बता दें, देश के प्रतिष्ठित अदाणी समूह ने गंगा एक्सप्रेसवे के चार में से तीन हिस्से तैयार किए हैं. 594 किलोमीटर में से 464 किलोमीटर की सड़क का निर्माण अदानी समूह को तरफ से किया गया है. ये सड़क सीमेंटेड नहीं बल्कि तारकोल से बनाई गई है. सीमेंटेड सड़क पर गर्मी के मौसम में हादसों को देखते हुए तारकोल वाली सड़क तैयार की गई है, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

बता दें, गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे, जिसकी लंबाई लगभग 700 से 750 किलोमीटर तक होगी, छह लेन का होगा और इसे बाद में आठ लेन तक बढ़ाने की योजना है। यह एक्सप्रेसवे ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के तहत बनाया जा रहा है, यानी इसका निर्माण पहले से मौजूद किसी सड़क को चौड़ा करने के बजाय नई जमीन पर किया जा रहा है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 35 हजार करोड़ रुपये है, और यह परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा विकसित की जा रही है।

यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बिजनौर, मुरादाबाद, संभल और बरेली जैसे जिलों को जोड़ेगा। इसके अलावा, यह मध्य यूपी के रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, सीतापुर, लखनऊ और बाराबंकी से भी गुजरेगा। पूर्वांचल में यह बहराइच, गोंडा, अयोध्या, बस्ती, संतकबीरनगर और गोरखपुर तक पहुंचेगा। इस मार्ग के बनने से यूपी के इन क्षेत्रों में न केवल सड़क यातायात की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में भी नई संभावनाओं का द्वार खुलेगा।

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs) और औद्योगिक क्लस्टर भी इस एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जाएंगे, जिनमें चीनी मिलें, फूड प्रोसेसिंग सेंटर और कोल्ड स्टोरेज शामिल होंगे। इससे उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को एक नई दिशा मिलेगी और राज्य में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे के रास्ते में बरेली और शाहजहांपुर जैसे शहरों में रिंग रोड और बाईपास का कनेक्शन भी मिलेगा, जिससे यातायात की गति और सुगमता में वृद्धि होगी।

गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह बिहार और पूर्वोत्तर भारत को यूपी से जोड़ते हुए दिल्ली एनसीआर से भी सीधा कनेक्शन बनाएगा। अब गोरखपुर से शामली तक पहुंचने में 12-14 घंटे का समय लगता था, जो इस एक्सप्रेसवे के बनने से महज 8-9 घंटे में कम हो जाएगा।

इस एक्सप्रेसवे को ‘नॉर्दर्न इकोनॉमिक कॉरिडोर’ के नाम से भी जाना जाएगा, जो यूपी, बिहार और चार अन्य राज्यों को एक बेहतर सड़क कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। साथ ही, इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से नेपाल बॉर्डर तक व्यापार का नया रास्ता खुलने की उम्मीद है। इसे देखते हुए, इस परियोजना का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा।

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