लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चल रही दरोगा भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में ‘अवसरवादी पंडित’ से जुड़े सवाल को लेकर उठे विवाद के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। रविवार सुबह उन्होंने सभी भर्ती बोर्ड को निर्देश देते हुए कहा कि परीक्षा से जुड़े किसी भी प्रश्न में जाति या धर्म को लेकर अमर्यादित टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। ऐसी गलती कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी और बार-बार गलती करने वालों को प्रतिबंधित किया जाएगा।

इस बीच उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर जानकारी दी कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की धार्मिक पहचान से जुड़े प्रतीकों जैसे कलावा या मंगलसूत्र को उतारने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।

रविवार को परीक्षा के दूसरे दिन कई केंद्रों पर व्यवस्था में कुछ नरमी भी देखने को मिली। अभ्यर्थियों का कलावा नहीं काटा गया और महिला अभ्यर्थियों से मंगलसूत्र भी नहीं उतरवाए गए। हालांकि सुरक्षा कारणों से गले की चेन, हाथ के कड़े, जूते और बेल्ट बाहर ही उतरवाए गए।

दरअसल, प्रदेश में दो दिन तक चलने वाली दरोगा भर्ती परीक्षा का रविवार को अंतिम दिन है। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जा रही है। पहली पाली सुबह 10 से 12 बजे तक हुई, जबकि दूसरी पाली दोपहर 3 से 5 बजे तक आयोजित होगी। भर्ती बोर्ड ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 1090 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से 4,543 पदों पर नियुक्ति की जाएगी।

भर्ती के लिए कुल 15,75,760 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें 11,66,386 पुरुष और 4,09,374 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं।
विवाद की शुरुआत शनिवार को सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल से हुई। प्रश्न था— “अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?” इसके विकल्पों में पंडित, अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी दिए गए थे। सवाल सामने आने के बाद इस पर विरोध शुरू हो गया।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह मामला स्वीकार्य नहीं है और जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं भाजपा के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, प्रकाश द्विवेदी और रमेश मिश्रा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश की कुल आबादी में ब्राह्मण समाज की हिस्सेदारी करीब 9 से 11 प्रतिशत बताई जाती है। राज्य के लगभग 31 जिलों में ब्राह्मण मतदाता प्रभावी भूमिका में माने जाते हैं और चुनावी राजनीति में उन्हें अहम स्विंग वोटबैंक के रूप में देखा जाता है।
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