लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को लेबर रूम में छोड़कर डॉक्टर और स्टाफ सो गए, जिससे हालात गंभीर हो गए।
रात में अस्पताल पहुंची थी प्रसूता
जानकारी के मुताबिक, जानकीपुरम निवासी अमित अपनी 26 वर्षीय पत्नी मीनाक्षी को 24 मार्च की रात करीब 12 बजे प्रसव के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी में मौजूद स्टाफ गहरी नींद में था और काफी प्रयासों के बाद महिला को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।
टेबल पर छोड़कर चले गए कर्मचारी
परिवार का कहना है कि प्राथमिक जांच के बाद स्टाफ ने यह कहकर महिला को टेबल पर छोड़ दिया कि अभी समय है, और वहां से चले गए। इसी दौरान महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
आधा बाहर आ गया था बच्चा
परिजनों के अनुसार, कुछ ही देर में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि नवजात शिशु का शरीर आधा बाहर आ गया, लेकिन वहां कोई चिकित्सकीय सहायता मौजूद नहीं थी। महिला की चीख-पुकार सुनकर जब परिजन अंदर पहुंचे, तब जाकर स्टाफ हरकत में आया और जल्दबाजी में प्रसव कराया गया।
नेग के नाम पर वसूली का आरोप
घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद उनसे 2200 रुपये ‘नेग’ के नाम पर जबरन वसूले गए। उनका दावा है कि यह प्रथा अस्पताल में आम हो चुकी है।
प्रशासन ने आरोपों से किया इनकार
वहीं, अलीगंज सीएचसी के प्रभारी डॉ. हेमंत ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यदि लिखित शिकायत मिलती है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है और उन्होंने जिम्मेदार डॉक्टरों व स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
OneIndia24live Hindi News Channel Today Breaking News Hindi Samachar