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यूपी में इसी हफ्ते हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार, दिल्ली में ‘मंथन’ के बाद फाइनल हुई लिस्ट !


लखनऊ : उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने अब रफ्तार पकड़ ली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं, जिसकी संभावना इसी सप्ताह जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में हलचल है कि यह विस्तार केवल प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि आगामी चुनावों को ध्यान में रखकर किया जाने वाला एक बड़ा ‘सोशल इंजीनियरिंग’ प्रयोग होगा।

दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व का मंथन

राजधानी लखनऊ में लंबी बैठकों का दौर चलने के बाद अब निर्णय का केंद्र दिल्ली स्थानांतरित हो गया है। उत्तर प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) बी.एल. संतोष के साथ एक अहम बैठक की है। देर रात तक चली इस बैठक में उन चेहरों पर मुहर लगाई गई है, जिन्हें योगी टीम में नई जिम्मेदारी दी जानी है।

संगठन और सरकार में एक साथ बदलाव

सूत्रों के अनुसार, भाजपा इस बार संगठन और सरकार में एक साथ नियुक्तियां करने की रणनीति पर काम कर रही है। संभावना है कि रविवार या सोमवार को नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाए। मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद ही संगठन के नए पदाधिकारियों की सूची भी जारी की जा सकती है। हाल ही में संगठन चुनाव के प्रेक्षक विनोद तावड़े ने लखनऊ में दो दिनों तक चली बैठक की अपनी विस्तृत रिपोर्ट गृह मंत्री अमित शाह को सौंप दी है, जिसके बाद से ही दिल्ली में यह मंथन शुरू हुआ।

जातीय समीकरण पर विशेष फोकस

2027 के चुनावी रण को देखते हुए इस विस्तार में जातीय समीकरणों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पार्टी का मुख्य उद्देश्य उन सामाजिक वर्गों को साधने का है, जो हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद पार्टी से दूर दिखे हैं। माना जा रहा है कि कुर्मी, पासी, ब्राह्मण और ओबीसी वर्ग के नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल कर क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश की जाएगी।

नए चेहरों की एंट्री, कुछ की हो सकती है छुट्टी

वर्तमान में यूपी मंत्रिपरिषद में रिक्त पदों को भरने के साथ-साथ, कुछ मौजूदा मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी की गई है। चर्चा है कि बेहतर प्रदर्शन न करने वाले कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, ताकि सरकार में नई ऊर्जा का संचार हो सके। रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर उन क्षेत्रों से भरा जाएगा जहाँ विकास कार्यों और राजनीतिक पकड़ को मजबूत करने की आवश्यकता है।

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