अलीगढ़ से एक बेहद चौंकाने वाली और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है, जहां “स्मार्ट सिटी” के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत गंभीर सवाल खड़े कर रही है। 21 अप्रैल 2026 की शाम सिविल लाइन क्षेत्र में तिकोना पार्क के पास सफाई कर्मियों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतारा गया।
अलीगढ़। शहर में स्मार्ट सिटी के नाम पर विकास कार्यों के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही उजागर हो रही है। सिविल लाइन क्षेत्र स्थित तिकोना पार्क के पास अख्तर टी स्टॉल के नजदीक सफाई कर्मियों को बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर की सफाई करते देखा गया।
मजदूर बिना दस्ताने, जूते और मास्क के गंदे पानी और सीवर में उतरकर काम कर रहे थे, जो उनकी जान के साथ सीधा जोखिम है। यह न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला मामला है, बल्कि कानून का भी खुला उल्लंघन है।
बताया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार का तर्क है कि “बार-बार सीवर में उतरना पड़ता है, इसलिए सुरक्षा किट देना संभव नहीं है।” हालांकि यह तर्क सवालों के घेरे में है, क्योंकि किसी भी परिस्थिति में मजदूरों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
भारत में लागू ‘प्रोहिबिशन ऑफ एम्प्लॉयमेंट ऐज मैनुअल स्कैवेंजर्स एंड देयर रिहैबिलिटेशन एक्ट, 2013’ के तहत बिना सुरक्षा उपकरण के सीवर की सफाई कराना दंडनीय अपराध है।
इस घटना ने अलीगढ़ नगर निगम और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती है और क्या “स्मार्ट सिटी” सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गई है?
मामले में जवाबदेही तय कर दोषियों पर कार्रवाई करना जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे खतरनाक हालात दोबारा न बनें और मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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