T20 World Cup 2026 जीतने के बाद, भारतीय क्रिकेटर के लेफ्ट हैंड बल्लेबाज ने अहमदाबाद से मुंबई तक का सफर कुछ अलग ही अंदाज़ में पूरा किया। सभी फ्लाइट बुक होने के कारण और रोड से यात्रा लंबी होने की वजह से उन्होंने ट्रेन के थर्ड AC को चुना। यात्रा के दौरान बीच-बीच में TC (ट्रेन कांस्टेबल) भी आया, लेकिन उन्होंने किसी को अपने पहचान का पता नहीं चलने दिया – पत्नी भी उनके साथ थीं। अब इस खिलाड़ी ने खुद ही सबके सामने बताया कि कैसे उन्होंने अपनी पहचान छिपाई।
न्यूजीलैंड के खिलाफ आखिरी ओवर में जब शिवम दुबे ने 3 चौके और 2 छक्के जड़कर भारत का स्कोर 250 के पार पहुंचाया, तो वो रातों-रात पूरे देश के ‘एक्शन हीरो’ बन गए। लेकिन इस ऐतिहासिक जीत के कुछ ही घंटों बाद, मैदान का ये बाहुबली एक ऐसी ‘सीक्रेट मिशन’ पर निकल पड़ा, जिसकी कहानी किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं है।
अहमदाबाद से मुंबई जाने वाली फ्लाइट्स का अकाल पड़ा तो शिवम ने वो रास्ता चुना जो एक वर्ल्ड चैंपियन के लिए लगभग नामुमकिन सा लगता है— ट्रेन का सफर, वो भी जनरल भीड़-भाड़ वाले थर्ड AC (3-Tier) कोच में।
छक्के छुड़ाने वाले खिलाड़ी का ‘मास्क’ वाला अवतार
मैदान पर गेंदबाजों के पसीने छुड़ाने वाले शिवम दुबे इस बार खुद थोड़े डरे हुए थे। डर आउट होने का नहीं, बल्कि फैंस की भीड़ में घिर जाने का था। अपने 4 साल के बेटे अयान और 2 साल की बेटी महविश से मिलने की बेताबी इतनी थी कि उन्होंने लग्जरी के बजाय समय को चुना। पहचान छिपाने के लिए दुबे ने फुल स्लीव टी-शर्ट, कैप और मास्क का सहारा लिया। स्टेशन पर हंगामा न हो, इसलिए वो ट्रेन छूटने के महज 5 मिनट पहले कोच में दाखिल हुए और चुपचाप अपनी ‘अपर बर्थ’ पर जाकर दुबक गए।
सफर के दौरान सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब टिकट चेकर (TTE) वहां पहुंचा। चार्ट पर ‘शिवम दुबे’ नाम देखते ही TTE चौंक गया और पूछा, “शिवम दुबे? वही क्रिकेटर?” पल भर के लिए सांसें थम गईं, लेकिन शिवम की पत्नी अंजुम ने बड़ी चतुराई से मोर्चा संभाला और मुस्कुराते हुए कहा— “अरे नहीं-नहीं, वो यहां कहां से आएगा?” ये सुनते ही टीटीई आगे बढ़ गया और भारतीय क्रिकेट का सितारा एक भूरे रंग के रेलवे कंबल में अपनी पहचान छिपाए मुस्कुराता रहा।
पुलिस भी रह गई दंग
पूरे 8 घंटे की यात्रा के दौरान शिवम ऊपर वाली सीट से नीचे नहीं उतरे। लेकिन असली चुनौती थी मुंबई का बोरीवली स्टेशन। दिन के उजाले में वहां से सुरक्षित निकलना टेढ़ी खीर था। आखिरकार उन्हें पुलिस की मदद लेनी पड़ी। जब पुलिस वालों को पता चला कि वर्ल्ड कप का हीरो एयरपोर्ट से नहीं बल्कि ट्रेन के डिब्बे से बाहर आने वाला है, तो उनकी भी आंखें फटी की फटी रह गईं। कड़ी सुरक्षा के बीच ‘अंडरकवर’ दुबे को स्टेशन से बाहर निकाला गया।
आंकड़ों में दुबे का धमाका
मैदान के बाहर सादगी दिखाने वाले दुबे ने मैदान के अंदर पूरे टूर्नामेंट में तबाही मचाई थी। गौतम गंभीर की कोचिंग और सूर्या की कप्तानी में दुबे ने मिडिल ऑर्डर की रीढ़ बनकर काम किया:
कुल रन: 235
औसत: 39
स्ट्राइक रेट: 169
बाउंड्री: 17 छक्के और 15 चौके
शिवम दुबे की ये कहानी बताती है कि एक खिलाड़ी के लिए मैदान की तालियां जितनी अहम हैं, घर पर बच्चों का इंतजार उससे कहीं बढ़कर है। चाहे इसके लिए उन्हें वर्ल्ड चैंपियन बनकर भी एक आम मुसाफिर की तरह अपर बर्थ पर सफर क्यों न करना पड़े।
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