बांदा की गौशालाओं की बदहाली उजागर, चारा-पानी का अभाव, गोवंशों की संख्या में कमी
Reporter: इकबाल खान
बांदा।
उत्तर प्रदेश में गौ संरक्षण को लेकर सरकार भले ही बड़े दावे कर रही हो, लेकिन बांदा जिले से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। बबेरू ब्लॉक की कई अस्थायी गौशालाओं में गोवंशों के लिए न तो पर्याप्त चारे की व्यवस्था है और न ही साफ पानी की।
बबेरू ब्लॉक की ग्राम पंचायत पारा बिहारी में संचालित अस्थायी गौशाला के निरीक्षण के दौरान हालात बेहद खराब मिले। यहां 111 गोवंश मौजूद बताए गए, लेकिन उनके लिए हरे चारे और साफ पानी की व्यवस्था नहीं मिली। गोवंशों को केवल सूखा भूसा खिलाया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान गौशाला परिसर के पास एक गड्ढे में मृत गोवंश पड़ा मिला, जिसे कुत्ते नोच रहे थे। इस दृश्य ने गौशाला प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया।
इसी तरह ग्राम पंचायत पलहरी में संचालित अस्थायी गौशाला की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। जानकारी के अनुसार अगस्त महीने में यहां 88 गोवंश संरक्षित थे, लेकिन वर्तमान में केवल 48 गोवंश ही मौजूद पाए गए।
हैरानी की बात यह रही कि इन 48 गोवंशों में से केवल पांच के ही टैग लगे मिले, जबकि बाकी बिना टैग के पाए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना टैग वाले गोवंशों के नाम पर भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है।
विश्व हिंदू महासंघ गौरक्षा के जिला अध्यक्ष महेश कुमार प्रजापति ने बताया कि उनकी टीम ने बबेरू ब्लॉक की कई गौशालाओं का निरीक्षण किया। अधिकांश स्थानों पर गोवंशों के लिए गर्मी के मद्देनजर कोई विशेष व्यवस्था नहीं मिली। पानी की टंकियां गंदगी से भरी हैं और चारे के नाम पर सिर्फ सूखा भूसा दिया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि कई गौशालाओं में अगस्त के मुकाबले गोवंशों की संख्या में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी आई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर इतने गोवंश कहां चले गए।
गौ संरक्षण के नाम पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन बांदा की गौशालाओं से सामने आई यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में जांच कर क्या कार्रवाई करता है।
OneIndia24live Hindi News Channel Today Breaking News Hindi Samachar