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हिंदुओं की घटती जनसंख्या चिंता जनक, घर वापसी का काम तेजी से होना चाहिएः मोहन भागवत


लखनऊः यूजीसी के समता संवर्धन कानून को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉण् मोहन भागवत ने कहा है कि कानून सभी को मानना चाहिए। यदि कानून गलत है तो बदलने का उपाय भी है। जातियां झगड़े का कारण नहीं बनना चाहिए। समाज में अपनेपन का भाव होगा तो इस तरह की समस्या नहीं होगी। मंगलवार को लखनऊ के निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में सामाजिक सछ्वाव बैठक में बोलते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉण् मोहन भागवत ने कहा कि जो नीचे गिरे हैंए उन्हें झुक कर ऊपर उठाना पड़ेगा। सभी अपने हैंए यह भाव मन में होना चाहिए।

संघर्ष से नहींए समन्वय से दुनिया आगे बढ़ती है। एक को दबाकर दूसरे को खड़ा करने का भाव नहीं होना चाहिए। डॉण् मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज को संगठित औऱ सशक्त होने की आवश्यकता है। हमको किसी से खतरा नहीं हैए लेकिन सावधान रहना है। हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरदस्ती हो रहे मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि घर वापसी का काम तेज होना चाहिए। जो लोग हिंदू धर्म में लौटेंए उनका ध्यान भी हमें रखना होगा। बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि घुसपैठियों को डिटेक्टए डिलीट और डिपोटर् करना होगा। उन्हें रोजगार नहीं देना है। उन्होंने कहा कि हिंदुओं के कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। वैज्ञानिकों के हवाले से उन्होंने कहा कि जिस समाज में औसतन तीन से कम बच्चे होते हैंए वह समाज भविष्य में समाप्त हो जाता है। यह बात हमारे परिवारों में नव दंपतियों को बताई जानी चाहिए।

सर संघचालक ने कहा कि विवाह का उद्देश्य सृष्टि आगे चलेए यह होना चाहिएए वासना पूर्ति नहीं। इसी भावना से कर्तव्य बोध आता है। उन्होंने कहा कि सछ्वाव न रहने से भेदभाव होता है। हम सभी एक देशए एक मातृभूमि के पुत्र हैं। मनुष्य होने के नाते हम सब एक हैं। एक समय भेद नहीं थाए लेकिन समय चक्र के चलते भेदभाव की आदत पड़ गई हैए जिसे दूर करना होगा। उन्होंने कहा कि सनातन विचारधारा सछ्वाव की विचारधारा है। उन्होंने कहा कि जो विरोधी हैंए उन्हें मिटाना हैए ऐसा हम नहीं मानते। एक ही सत्य सर्वत्र है। इस दर्शन को समझ कर आचरण में लाने से भेदभाव समाप्त होगा। सरसंघचालक ने कहा कि घर.परिवार का आधार मातृशक्ति है।

हमारी परंपरा में कमाई का अधिकार पुरुषों को थाए लेकिन खर्च कैसे होए यह मातायें तय करती थी। मातृशक्ति विवाह के बाद दूसरे घर में आकर सभी को अपना बना लेती है। पश्चिम में महिलाओं का स्तर पत्नी से हैए हमारे यहां उन्हें माता माना जाता है। उनका सौंदर्य नहींए वात्सल्य देखा जाता है। डॉण् भागवत ने कहा कि भारत निकट भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देगा। विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान भारत के पास ही है।

उन्होंने समाज की सज्जन शक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि बस्ती स्तर पर सामाजिक सछ्वाव से जुड़ी बैठकें नियमित होनी चाहिए। हम आपस में मिलेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी। इस प्रकार की बैठकों में रूढि़यों से मुक्त होने पर चर्चा होनी चाहिए। जो समस्याएं सामने आएंए उनको दूर करने का प्रयास होना चाहिए। जो दुर्बल हैए उनकी सहायता करना चाहिए। सर संघचालक ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे देशों में बैठे कुछ लोग हमारी सछ्वावना के विरुद्ध योजना बना रहे हैं। इससे हमें सावधान रहना होगा। एक दूसरे के प्रति अविश्वास समाप्त करना होगा। एक दूसरे के दुख दर्द में शामिल होना होगा।

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