प्रयागराज: 22 दिसंबर 2016 की वो तारीख, जब मौसम सर्द हवाओं का था, लेकिन हूटर बजाती गाड़ियों के एक काफिले ने माहौल में अचानक गर्मी बढ़ा दी। काफिला भी कोई आम नहीं… एक के पीछे एक तकरीबन 500 गाड़ियां और एक ऐसे नेता का शक्ति प्रदर्शन, जो जुर्म की दुनिया से राजनीति में उतरा था। काफिले की वजह से पूरा शहर जैसे थम सा गया था। हूटरों के शोर ने जाम में फंसी एंबुलेंस के भीतर मरीजों की आह को भी अनसुना कर दिया। पत्रकारों ने सवाल पूछा कि आपके काफिले की वजह से एंबुलेंस फंसी रही, तो जवाब मिला- ‘आप क्या चाहते हैं कि मैं साइकिल से अकेले आऊं।’ ये काफिला था माफिया डॉन से नेता बने अतीक अहमद का।
अतीक अहमद, पूर्वांचल की राजनीति और यूपी में अपराध जगत का वो नाम, जिसने सिस्टम के भीतर एक सिस्टम बना दिया था। बंदूक और बैलेट के कॉकटेल से वो खुलेआम सड़कों पर मौत का नंगा नाच कराता था। इलाहाबाद के धूमनगंज इलाके की सड़कें आज भी गवाह हैं उस विधायक राजू पाल हत्याकांड की, जब अतीक के गुंडों ने उन्हें 5 किलोमीटर तक पीछा करते हुए गोलियों से छलनी कर दिया। वजह महज इतनी कि राजू पाल ने विधानसभा चुनाव अतीक अहमद के भाई को हरा दिया था।
इलाहाबाद की सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी आज भी उस मंजर को नहीं भूली है, जब अतीक अहमद और उसके गुंडे बंदूकों के साथ वहां पहुंचे और शिक्षकों को राइफल की नोंक पर खड़ा कर दिया। वजह केवल इतनी सी थी कि अतीक के बेटे को घर पर ट्यूशन पढ़ाने वाला इसी यूनिवर्सिटी का छात्र था और परीक्षा में नकल करते हुए पकड़ा गया था। उसे सस्पेंड किया गया तो अतीक ने अपनी गुंडई से पूरी यूनिवर्सिटी में दहशत मचा दी। सिस्टम लाचार था और अतीक बेखौफ।
धुरंधर 2 का आतिफ असलम कौन है?
इस नाम की चर्चा आज इसलिए हो रही है, क्योंकि 19 मार्च को रिलीज हुई निर्देशक आदित्य धर की फिल्म धुरंधर-2 में अतीक अहमद का किरदार दिखाया गया है। फिल्म में किरदार को भले ही आतिफ अहमद नाम दिया गया है, लेकिन कहानी यूपी के अतीक अहमद की ही है। फिल्म में दिखाया गया है कि पाकिस्तान से आने वाली नकली नोटों की खेप को यूपी के चुनावों में खपाने का जिम्मा आतिफ के पास था। हालांकि, नकली नोटों की ये खेप यूपी में उतर पाती, उससे पहले ही एजेंसियों ने आतिफ को मरवा दिया।
अतीक अहमद की क्राइम कुंडली
1962 में इलाहाबाद में जन्मे अतीक अहमद ने छोटी सी उम्र से ही जुर्म की सड़कों पर अपने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए थे। महज 17 साल की उम्र थी उसकी, जब 1979 में उसके ऊपर हत्या का पहला आरोप लगा। इसके बाद अतीक अहमद के गुनाह बढ़ते रहे और उसके नाम पर मुकदमे दर्ज होते गए। 1983 में उसके खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज हुई और इसके बाद लिस्ट में हत्या, रंगदारी, किडनैपिंग, धमकी और जमीनों पर कब्जे जैसे 100 से ज्यादा संगीन मामले शामल हो गए।
अतीक अहमद का सियासी करियर
1989 में अतीक अहमद राजनीति में उतरा और यूपी की इलाहाबाद पश्चिम सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचा। इस जीत ने अतीक को एक नई ताकत दी। इसके बाद वह पांच बार विधायक रहा और साल 2004 में फूलपुर लोकसभा से चुनाव जीतकर देश की संसद का सदस्य बना। उसने जुर्म और राजनीति के बीच की लकीर को जिस हद तक धुंधला कर दिया, वैसा कभी कोई नहीं कर पाया था।
2023 में हुई अतीक अहमद की मौत
आखिरकार अतीक अहमद के गुनाहों का भी हिसाब हुआ। 15 अप्रैल 2023 को, जब पुलिस अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को रुटीन चेकअप के लिए जेल से अस्पताल ले जा रही थी, तो तीन युवकों ने दोनों भाइयों के ऊपर गोलियां बरसा दीं। ये तीन युवक- लवलेश तिवारी, अरुण मौर्य और सनी पत्रकारों की भीड़ में शामिल थे। गोलियों से छलनी अतीक अहमद और उसके भाई ने दम तोड़ दिया। पूरे देश ने दोनों भाइयों की इस मौत को लाइव देखा।
अतीक अहमद की संपत्ति
अनुमान के मुताबिक, अतीक अहमद लगभग 11 हजार करोड़ की संपत्ति का मालिक था। परिवार के लोगों और उसके साथियों के नाम पर 200 से ज्यादा बैंक खाते थे। करीब 50 शेल कंपनियों के जरिए उसने हवाला के धंधे को अंजाम दिया। अतीक अहमद की असली ताकत थी, जेल में रहते हुए भी अपराध को अंजाम देना। वो जेल के भीतर बैठकर भी अपना नेटवर्क चलाता था। उसके गुर्गे एक इशारे पर किसी की भी जान ले लेते थे।
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